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# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Saturday, 13 January 2018

मुंगेर में अनूठे ग़ज़लगो छंदराज की पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी 6.01.2018 को संपन्न

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विशिष्ट प्रयोगधर्मी कवि छन्दराज को काव्यमयी श्रद्धाजलि





दिनांक  06.01.2018 को बेलपत्ता भवन, मुंगेर के सभाकक्ष में हिन्दी ग़ज़ल में अनूठे प्रयोग के लिए सुचर्चित और सुख्यात शायर छंदराज जी की दूसरी पुण्यतिथि पर आयोजित प्रथम सम्मान समारोह में पटना से शामिल गज़लगो कवि घनश्याम, खगड़िया से पधारे कवि, साहित्यकार और 'कौशिकी' पत्रिका के संपादक कैलाश झा 'किंकर' को भी सम्मानित किया गया.

इस अवसर पर मुंगेर के अलावा बरियारपुर, जमालपुर,सूर्यगढ़ा, खगड़िया आदि सुदूरवर्ती क्षेत्रों से इस कडके की ठंड में भी अनेक साहित्यिक और सामाजिक शख़्सियतों ने उपस्थित होकर उनकी स्मृतियों को साझा किया और उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया.


दूसरे चरण में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें श्री अनिरुद्ध सिन्हा, विजेता मुदगलपुरी, फैयाज रश्क, रामबहादुर चौधरी 'चंदन', कुमार विजय गुप्त, अंजनी कुमार सुमन, एस.बी.भारती, विकास 'मुंगेर, प्रमोद कुमार निराला, शशि आनन्द 'अलबेला', सुबोध छवि, प्रभात मिलिंद, मधुसूदन आत्मीय, कामरेड दशरथ सिंह, कैलाश झा 'किंकर' और अन्य कवियों के अलावा कवि घनश्याम ने भी काव्य-पाठ किया.

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रो.शब्बीर हसन ने छंदराज जी के व्यक्तित्व और कृतित्व की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और सम्मानित होने वाले कविद्वय की रचनाधर्मिता के पहलुओं की चर्चा की. हिन्दी ग़ज़ल के उभरते हुए ग़ज़लकारों की विशेषताओं से हमारा परिचय कराने में संलग्न सुप्रतिष्ठित शायर और ग़ज़ल के समर्थ आलोचक श्री अनिरुद्ध सिन्हा और समकालीन कविता के सुपरिचित कवि कुमार विजय गुप्त ने छंदराज जी के व्यक्तित्व की विशेषताओं और उनसे जुड़े अपने संस्मरण की चर्चा की.

बरियारपुर से पधारे चर्चित पत्रकार और समीक्षक श्री विनय कुमार सिंह, सूर्यगढ़ा के कवि और पत्रकार श्री राजेन्द्र राज ने भी विशेष रूप से छंदराज जी के व्यक्तित्व के अनूठेपन और कृतित्व के अनछुए संदर्भ की चर्चा से उन्हें अपनी शब्दांजलि अर्पित की.

अध्यक्षता की श्री जनार्दन झा 'जगप्रिय' ने किया. मुख्य अतिथि थे कामरेड दशरथ सिंह और संचालन किया समकालीन कविता के सुपरिचित और सशक्त हस्ताक्षर कुमार विजय गुप्त ने. कार्यक्रम श्री एस.बी.भारती के सक्रिय संयोजन में सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ.
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रिपोर्ट के लेखक- घनश्याम 
छायाचित्र- कुमार विजय गुप्त
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