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बिहार, भारत की कला, संस्कृति और साहित्य.......Art, Culture and Literature of Bihar, India ..... E-mail: editorbejodindia@yahoo.com / अपनी सामग्री को ब्लॉग से डाउनलोड कर सुरक्षित कर लें.

# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Tuesday, 26 February 2019

साहित्यिक संस्था पंक्षी का ओपन माइक कार्यक्रम दिनांक 24.02.19 को पटना सीटी में संपन्न

ये ज़मीं ऐसी शोला बदन हो गई / उठ रहा हर तरफ धुआँ आजकल


दिनांक 24.02.19 को साहित्यिक संस्था 'पंक्षी' के द्वारा में पटना सिटी के पन्नालाल मुक्ताकाश मंच पर ओपन माइक का सफ़ल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ कुमार निशांत ने सरस्वती वंदना से हुआ। पंक्षी के संस्थापक विष्णु ने अपने स्वागत भाषण में उपस्थित सभी अतिथि गणों का स्वागत कर संस्था के सहित्यिक एवं सांस्कृतिक उद्देश्य को लोगों के सामने रखा। इस अवसर पर मशहूर शायर मो.नसीम अख्तर , कवि घनश्याम, प्रभात कुमार धवन, शाइस्ता अंजुम विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे।

शायर मो. नसीम अख्तर ने पेश किया-
नदियां खून की हैं र'वाँ आजकल
कौन कहता लहु है गिराँ आजकल
ये ज़मीं ऐसी शोला बदन हो गई
उठ रहा हर तरफ धुआँ आजकल।

कुमारी स्मृति-
हवा ज़रा बुझा दो नफरतों का सिलसिला।
शहर-शहर आग है कौन सा ये गुल खिला।

कवि घनश्याम ने कहा कि -
दो दिलों के दरम्याँ दूरी बढ़ाता कौन है।
हमको आपस में लड़ाकर मुस्कुराता कौन है।

प्रभात कुमार धवन ने मार्मिक रचना पढ़ी -
नींद खुलते ही
तुम्हारी
मृत्यु की ख़बर मिली
विश्वास तो तब हुआ
जब तुम्हारी
अधजली लाश मिली

शाइस्ता अंजुम ने देशभक्ति का जज़्बा जगाया -
कभी ठंड मे ठिठुर के देख लेना
कभी तपती धूप मे जल कर देख लेना
कैसे करते हैं हम हिफाजत मुल्क की 
कभी सरहद पर चल के देख लेना
कभी लडते नहीं जाति के नाम पर
कभी सैनिक कि छावनी मे आ कर देख लेना

विनय मिश्रा, हरिहर, प्रज्ञा कपूर ,हृतविक भदानी, मोहित, सौरव, किशन इत्यादि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नवाज़ अली अख्तर ने कार्यक्रम का सफ़ल संचालन किया और अपनी गायिकी से समां बांध दिया। साथ में अनिकेत ने भी अपना बेहतरीन गीत प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में विष्णु ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
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आलेख - मो. नसीम अख्तर
छायाचित्र - पंक्षी
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com








Monday, 25 February 2019

"आगमन" एवं "भारतीय युवा साहित्यकार परिषद" की साहित्यिक गोष्ठी पटना में 24.2.2019 को संपन्न

 फूंक डाले जालिमों ने गुलिस्ता दर गुलिस्ता / बुलबुले जाएं कहां अब चाहने के लिए
आतंकवाद व साम्प्रदायिकता के खिलाफ़ काव्योत्सव का आयोजन



वर्तमान हालात में आतंकवाद व साम्प्रदायिकता के खिलाफ़ पूरा देश संवेदनशील है। समाज का हर तबका इन दोनों के विरोध में एकजुट खड़ा है, ऐसे में हमारे बुद्धिजीवी वर्ग व साहित्यकार भी शब्दों के माध्यम से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

इसी कड़ी में साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था "आगमन" एवं "भारतीय युवा साहित्यकार परिषद, पटना" के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 24.02.2019 को एस. के. पुरी पार्क पटना के उन्मुक्त वातावरण में मासिक गोष्ठी-सह- काव्योत्सव का आयोजन किया गया। आतंकवाद व साम्प्रदायिक ताकतों के विरोध विषय पर सभी सुधी कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत की जिसे सुनने राहगीर के कदम भी ठिठक गए और सभी देशभक्ति और आपसी सौहार्द की भावना से ओतप्रोत हो गए।

कवि व चित्रकार सिद्धेश्वर ने आतंकवाद व साम्प्रदायिकता के विरोध में कविताओं और लघुकथा पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई जिसने इस काव्योत्सव में और भी रंग भर दिया।

इस अवसर पर नगर के प्रतिनिधि कवियों ने अपनी कविता, गीत, ग़ज़ल के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ जबरदस्त आवाज उठाई। पढ़ी गई कुछ कविताओं के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:-

 समीर परिमल - 
"लड़ने से बाज आ, लड़ाने से बाज आ
 नफरत की आग लगाने से बाज आ।"

वीणाश्री हेम्ब्रम - 
"आतंकवाद छोड़ शांति को, जिसने भी है ठानी
सम्मानित अशोक चक्र से, कितने ही नज़ीर वानी।"

शमा कौसर शमां -
 "फूंक डाले जालिमों ने गुलिस्ता दर गुलिस्ता
 बुलबुले जाएं कहां अब चाहने के लिए।"

इंजीनियर गणेश जी बागी - 
"कायर हो तुम जो पीठ पर वार करते हो
गीदड़ की तरह पीछे से प्रहार करते हो।", 

मधुरेश नारायण - 
"शहीदों की कुर्बानी ऐ मेरे प्यारे वतन, बेकार न जाने पाए 
नापाक इरादे दुश्मनों के ए मेरे प्यारे वतन, साकार न होने पाए।",

कवि सिद्धेश्वर ने विश्व से आतंकवाद का खात्मा करने का सन्देश देती हुई कविता पढ़ी।. 

 पूनम सिन्हा श्रेयसी - 
"अभी अभी पैगाम आया है 
सबकी आंखों में समंदर उतर आया है।". 

डॉ. पंकज प्रियम - 
"देश की खातिर जिन वीरों ने, यारों दे दी अपनी जान 
नमन करें हम उन वीरों को, अमर हुए जो वीर जवान।"  

सुनील कुमार - 
"दीन धर्म से ऊपर उठकर, एक बार हुंकार करो
 टूट पड़ो अब आतंकियों पर, खुद को एक तलवार करो।"

 एम. के. मधु - 
"हम अमन चैन के वासी, अमन की बात करते हैं
दुश्मन जब हमलावर हो, हम दमन की बात करते हैं।"

इन कवियों के अतिरिक्त हास्य कवि विश्वनाथ वर्मा,  डॉक्टर अन्नपूर्णा श्रीवास्तव, इंजीनियर शुभ्र कांत सिन्हा, चंद्रशेखर प्रसाद श्रीवास्तव आदि कवियों ने अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से सभी श्रोताओं को मुग्ध किया।

गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. एम. के. मधु ने की तथा संचालन वीणाश्री हेम्ब्रम व कवि सिद्धेश्वर ने किया।

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आलेख - कवि सिद्धेश्वर एवं वीणाश्री हेम्ब्रम
छायाचित्र सौजन्य - समीर परिमल / ई. गणेश बागी
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com










Sunday, 24 February 2019

'आखर' के अंतर्गत 20.2.2019 को पटना में जयकांत सिंह 'जय' से ब्रज भूषण मिश्र की बातचीत का कार्यक्रम संपन्न

भोजपुरी बोली नहीं बल्कि एक भाषा है किन्तु मौलिक भोजपुरी की पढाई का आभाव 





लिपि भाषा का लिबास होता है। यह बात  भोजपुरी  के प्रसिद्ध साहित्यकार जयकांत सिंह 'जय'  ने प्रभा  खेतान  फाउंडेशन, मसि इंक द्वारा आयोजित एंव श्री सीमेंट द्वारा प्रायोजित आखर नामक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही।

सबसे पहले पुलवामा हमले में शहीद 44 सीआरपीएफ जवानों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गयी  तत्पश्चात भोजपुरी के साहित्यकार ब्रज भूषण मिश्र जी और हिंदी साहित्य के कथाकार और नाटककार हृषिकेश सुलभ जी ने हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार नामवर सिंह जी पर अपने संस्मरण सुना कर उन्हें याद किया और एक मिनट का मौन रखा गया। 

भोजपुरी भाषा और साहित्य पर बात करते हुए साहित्यकार जयकांत सिंह 'जय' से ब्रज भूषण मिश्र जी ने भाषा साहित्य के प्रति उनकी रुचि कैसे जाग्रत हुई इस पर सवाल किया।  उन्होंने कहा कि बचपन में अन्तराक्षरी में गीत गाने के क्रम अनायास ही पैरोडी हो जाती थी जिससे लिखने की रुचि जागी। शुरुआती दिनों में तो हिंदी में ही लेखन जारी था बाद में उमेश मिश्र जी के प्रभाव में आकर भोजपुरी लेखन की ओर रुख किया। 

भोजपुरी भाषा के स्वरूप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भाषा का वैज्ञानिक विमर्श न हो, व्याकरण न हो तब तक उस भाषा का सम्मान नहीं होता है। पटना आकाशवाणी आने के बाद भाषा विज्ञान में रूचि पैदा हुई।
भोजपुरी भाषा और बोली के प्रश्न पर डॉ जयकांत ने कहा कि जॉर्ज ग्रेसियनन ने अपने पुस्तक में भोजपुरी को बोली नहीं भाषा करार दिया, उन्होंने अपने ग्रामर में भोजपुरी शब्दकोश एवं व्याकरण को स्थान दिया। भोजपुरी की ध्वनि प्रकृति एवं भाव मागधी एवं स्वरसैनि से कोई संबंध नही है। अक्षर का उच्चारण भोजपुरी में विशिष्ट है। भोजपुरी का व्याकरण अन्य क्षेत्रीय भाषा के व्याकरण से सरल है। व्याकरण उसके लिये बनाई जाती जिसकी वह अपनी मातृभाषा नहीं होती है।

भोजपुरी लिपि के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि लिपि भाषा का लिबास है। भारत में मुख्य रूप से दो ही लिपि थी ब्राह्मी और खरोष्ठी । देवनागरी बाद में आई। देवनागरी संस्कृत की लिपि है न कि हिंदी की। 1873 के बाद हिंदी ने अपना स्वरूप विस्तार किया तो देवनागरी को प्रचलित करना शुरू किया। शेरशाह सूरी के समय तक भोजपुरी का लेखन कैथी लिपि में होता था। 

भोजपुरी अध्ययन अध्यापन की स्थिति और संस्थानों का योगदान वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय और जय प्रकाश विश्वविद्यालय ने योजनाबद्ध तरीके से अध्यापन का कार्य नहीं शुरू किया। इसीलिए सीनेट और यूजीसी ने इसे मान्यता नहीं दिया। नालन्दा ओपन यूनिवर्सिटी में भी फैकेल्टी नहीं होने के कारण पढ़ाई बंद हो गयी। बीएचयू और लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू हुई है लेकिन भोजपुरी के बदले हिंदी में ही  पढ़ाई हो रही है वहां मौलिक भोजपुरी की पढ़ाई का अभाव है। 

भोजपुरी गद्य के उद्भव और विकास पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा का जन्म ही गद्य में ही होता है । 1664 से ही भोजपुरी में गद्य लिखना जारी है 1942 में राहुल सांस्कृत्यायन ने जेल से ही भोजपुरी भाषा में गद्य लिखें । आये दिन रोज भोजपुरी भाषा में किताबें तो आ रही है लेकिन व्यवस्थित ढंग से प्रकाशक और वितरक का घोर अभाव रहता है। अपनी कहानी के लेखन के प्रक्रिया में उन्होंने कहा कि कहानी सबके भीतर होती है । मैं अपने मन की ही अभिव्यक्ति को कहानी बना देता हूँ। 

इसके बाद उन्होंने अपनी लिखी रचनाओं का पाठ किया । श्रोताओं से प्रश्न के दौरान उन्होंने कहा कि भारत सरकार का भाषा संवर्धन के प्रति कोई नीतिगत योजना नहीं है। कार्यक्रम के अंत में भोजपुरी भाषा के मशहूर व्यंगकार और ग़ज़लकार राम दीप पाण्डे "अकेला" जी जो इसी महीने देह त्याग गए उनको यशवंत मिश्रा जी ने अपनी संवेदनाओं से उन्हें याद किया। 

इस कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन मसि इंक की संस्थापक और निदेशक आराधना प्रधान ने किया।इस कार्यक्रम में उपन्यासकार रत्नेश्वर सिंह, भगवती प्रसाद, हृषिकेश सुलभ, कौशल महोब्बतपुरी , डॉ. रंजन विकास , अन्विता प्रधान, शाहनवाज खान आदि लोग उपस्थित थे।
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आलेख - सत्यम कुमार 
छायाचित्र - आखर
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com



Saturday, 23 February 2019

बिहार सरकार मं.स. (रा.भा.) के दो-दिवसीय हिन्दी साहित्य समागम एवं कवि गोष्ठी का प्रथम दिन 23.2.2019 को पटना में

अपनी भाषा से प्रेम करिए लेकिन दूसरी भाषाओं का आदर करिए


बिहार सरकार मंत्रिमंडल सचिवालय (राजभाषा) विभाग के दो-दिवसीय हिन्दी साहित्य समागम एवं कवि गोष्ठी में आज प्रथम दिन 23.2.2019 के आयोजन, ए. एन. सिन्हा इन्स्टीट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज, गाँधी मैदान, पटना में साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। डॉ. उषा किरण खान, राम कुमार पासवान, हरिहर सिंह, सुशील भारद्वाज, कथाकार विपिन बिहारी और शैलेंद्र कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे

कार्यक्रम की शुरुआत बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा के उद्घाटन से हुई। राजभाषा निदेशक इम्तियाज अहमद करीमी के स्वागत भाषण के बाद शिक्षा मंत्री का सम्बोधन हुआ। शीघ्र ही मंत्री महोदय के द्वारा राजभाषा पाण्डुलिपि प्रकाशन योजनान्तर्गत चयनित पाण्डुलिपि के रचनाकारों को पुरस्कार वितरित कर दिया गया। श्री वर्मा  उर्दू बहुत अच्छा बोलते हैं। उनके उर्दू शब्दों के उच्चारण कमाल के हैं।

मंच पर सत्य नारायण, अध्यक्ष, हिन्दी प्रगति समिति, बिहार भी मौजूद रहे।

पुरस्कार पानेवालों में बहुत जाने पहचाने साहित्यकार हैं। जिन्हें पुरस्कार मिला उनमें से कुछ हैं-

अरविन्द पासवान : 'मैं रोज लड़ता हूँ' कविता संग्रह
हरिनारायण सिंह हरि - "हुआ कठिन अब सच सच लिखना" गीत संग्रह 
विपिन बिहारी : 'उनसे दूर' कहानी संग्रह
सुशील भारद्वाज : 'जनेऊ' कहानी संग्रह

एक कवि हरिनारायण सिंह हरि ने बताया कि उन्हें रु. 29750/= की राशि इस योजना में मिली। वस्तुतः सभी रचनाकारों की पाण्डुलिपि के पृष्ठों के आधार पर उनके प्रकाशन की राशि के खर्च को ध्यान में रखते हुए ये राशियाँ दी गई हैं।  अरविंद पासवान ने कहा कि उनकी पाण्डुलिपि तैयार करने-कराने और राजभाषा विभाग को प्रेषित करने में डॉ. मुसाफ़िर बैठा जी की खास भूमिका रही। 

उद्घाटन सत्र का प्रतिपाद्य : हिन्दी और हिन्दी समाज

विषय पर बीज वक्तव्य डॉ. बलराम तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, पटना विश्वविद्यालय, पटना का रहा। अपनी बात शुरु करने से लेकर वे अन्त तक कहते रहे : यह अन्तिम बात कह रहा हूँ। और अन्त-अन्त तक वह बात अन्तिम न हो सकी। हालाँकि इस व्यापक विषय पर उन्होंने जनसरोकार से जोड़ते हुए सरस होकर तकनीकी पक्षों के साथ अकादमिक बातें कीं जो सराहनीय है।

इसी विषय पर अमृतसर से आए हुए डॉ. पाण्डेय शशिभूषण शीतांशु ने अपनी बात रखी।

अध्यक्षता डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, साहित्य अकादमी, तथा संचालन डॉ. पल्लवी विश्वास ने किया।

अध्यक्षीय भाषण में तिवारी जी ने कहा : भाषा कोई हो, वह अपने-आप में पूर्ण है। चाहे उसे सौ या दो सौ लोग बोलते हों।

लगभग सभी वक्ताओं ने कहा : अपनी भाषा से प्रेम करिए, लेकिन दूसरी भाषाओं का आदर करिए।


दूसरे सत्र का विषय था : 'वर्तमान समय में साहित्य की प्रासंगिकता'


अध्यक्षता : डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी 
संचालन : भावना शेखर, लेखिका,
विजय प्रकाश, लेखक
वक्ता : डॉ. बलराम तिवारी 
डॉ. रेवती रमण 
डॉ. भगवान सिंह और
बद्री नारायण

प्रख्यात आलोचक श्री विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि "साहित्य के लिए शब्द, शस्त्र बन जाता है। साहित्य शब्द के माध्यम से एक अहिंसक कार्रवाई है। 

विषय पर वक्तव्य से सहमति-असहमति व्यक्त की जा सकती है, पर विचार को खारिज नहीं किया जा सकता। संदर्भों, उदाहरणों और रचनाकरों की रचनाओं का उल्लेख कर वक्ताओं ने साहित्य की प्रासंगिकता को समझाने की कोशिश की।

कार्यक्रम में कई रचनाकरों, संस्कृतिकर्मियों और साहित्य प्रेमियों ने शिरकत की जिनमें विजय प्रकाश, दिलीप कुमार, एम. के. मधु, सिद्धेश्वर ,  बी. एन. विश्वकर्मा, लता प्रासर, भावना शेखर, सिन्धु कुमारी, विशाखा, डॉ. प्रतिभा कुमारी, अनिल लोदिपुरी और राकेश शर्मा आदि भी शामिल थे
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आलेख - अरविंद पासवान / सिद्धेश्वर / हरिनारायण सिंह हरि
छायाचित्र सौजन्य - अरविन्द पासवान / सिद्धेश्वर / हरिनारायण सिंह हरि
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नोट- प्रतिभागी अपने चित्र और वक्तव्य भेजें.














 





    





Wednesday, 20 February 2019

देशभक्तिपूर्ण कवि गोष्ठी बिहार हिंदी साहित्य सम्मलेन, पटना में 17.2.2019 को संपन्न

इस वतन ने खो दिया जांबाज फिर बेटे कई 



देश पर जब संकट आता है तो सारे देशवासी एक होकर उसका मुकाबला करते हैं. पुलवामा पर हमले में हमारे देश ने जब अनेक वीर जवानों को खोया तो देश के हरेक बच्चे, युवा, बूढ़े व सभी नर-नारियों, सबों को काफी धक्का लगा पर अगले ही पल सब ने अपनी हिम्मत जुटाई और फिर से कमर कस ली हर हाल में अब किसी भी आक्रमण या आतंकवादी कार्रवाई का सफलतापूर्वक मुकाबला करते हुए आक्रमणकारियों को धूल चटाने की.  देश के स्वाभिमान को शिखर पर कायम रखना एक बड़ी प्राथमिकता है.

इसी सिलसिले में एक नए मासिक अखबार "आज उठी है आवाज़" की ओर से आयोजित कार्यक्रम, 'आओ कुछ अल्फाज़ कहें' पुलवामा शहीदों को समर्पित किया गया। बिहार हिंदी साहित्य सम्मलेन, पटना  में  दिनांक 17 फरवरी 2019 को आयोजित कार्यक्रम के संयोजक थे अश्विनी कुमार कविराज और संचालन किया अभिलाषा सिंह ने।

सर्वप्रथम राष्ट्रगान गा कर शहीदों के लिए मौन रखा गया।  इस अवसर पर अखबार  के जहानाबाद संस्करण एवं पटना संस्करण के फरवरी माह के अंक का लोकार्पण किया गया। जहानाबाद संस्करण के सम्पादक अमृतेश कुमार मिश्र इस अवसर पर मौज़ूद थे । विशिष्ठ अतिथियों में तारीफ़ नियाजी रामपुरी, विभा रानी श्रीवास्तव, योगेन्द्र प्रसाद मिश्र, नरेंद्र देव और सुनील कुमार मौज़ूद थे।

फिर चला कविता पाठ का सत्र जिसमें पहले सुपर-30 फिल्म के चाइल्ड आर्टिस्ट घनश्याम, सूरज, नवीन, सन्नी, कृष्ण, रौशन आदि बच्चों ने अपनी कवितायेँ सुनईं. फिर जब सलमान द्वारा देशभक्ति  गीत प्रस्तुत किया गया, लोगों ने खूब सराहा।

कवि सुनील कुमार द्वारा प्रस्तुत ग़ज़ल का अंश कुछ यूं था -

इस वतन ने खो दिया जाँबाज़ फिर बेटे कई
आँसुओं की धार बनकर बह गए सपने कई

कोख उजड़ी फिर कहीं सिंदूर माथे का धुला
फिर तिरंगे में लिपटकर आ गए रिश्ते कई

खून खौला फिर वतन का देख खूनी मंज़रें
पूछता है शासकों से प्रश्न फिर तीखे कई

उसकी कथनी और करनी में कहाँ कुछ मेल है
दोस्तानी राह में हम खा चुके धोखे कई

कवि अनमोल सावर्ण ने एकता का संदेश देते हुए सुनाया कि
मंदिर मस्जिद से बेदाग दामन चाहिए,
अब मुल्क को पैग़ाम-ए-अमन चाहिए।

कवि शैलेश कुमार वर्मा ने एक लंबी कविता सुनाई और अमर शहीदों के लिए जन्नत की कामना करते हुए उनकी शहादत को नमन किया।
शहीदों तुम से यह वतन है
एक बार नहीं सौ बार नमन है
कर पूरी हर मन्नत देना
भगवन इनको जन्नत देना।

दिल्ली से आये अतिथि शायर तारीफ़ नियाजी ने मंच से ऐसा समा बाँधा कि समस्त सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो गया। उन्होंने अपनी ग़ज़लों के अलावे एक गीत "बचा लो अपना हिंदुस्तान" की शानदार प्रस्तुति दी। अमित कश्यप ने रंग दे बसंती चोला गाकर तालियाँ बटोरी। औरंगाबाद के कवि कुश सिंह आज़ाद 'भारत' ने वीर रस की एक कविता सुनाई ।अमृतेश मिश्र द्वारा, 'बुरी नज़रें भी मेरा खाक कुछ बिगाड़ेंगी, "माँ के हाथ से टीका लगा निकलते है" सुनाया।

परवेज़, नैतिक, साइस्ता अंजुम, शिवांगी सौम्या, मीरा श्रीवास्तव, अंकित मौर्य, रजनीश कुमार गौरव, शिवम झा, शिवम कुमार, शुभम सहाय, गोपाल जी गुप्ता, अभिषेक आज़ाद, शैलेश वर्मा, सुशांत सिंह, शाहिद रज़ा, हिमांशु गौरव, अनमोल सावर्ण, विकास कुमार सिंह, स्तुति झा, निधि कुमारी, सुबोध कुमार सिन्हा, इरशाद फतेह, सलमान आदि ने भी इस अवसर पर काव्यपाठ किया। युवाओं की भागीदारी काबिले-तारीफ़ कही जा सकती है.

अंत में धन्यवाद ज्ञापन अश्विनी कुमार कविराज ने किया और कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की गई.
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आलेख : अश्वनी कुमार ‘कविराज’/ सुनील कुमार
छायाचित्र सौजन्य - सुनील कुमार 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com










Monday, 18 February 2019

"हमारे अल्फ़ाज़" द्वारा ओपन माइक का आयोजन 17.2.2019 को पटना में संपन्न

गीतों से गूँज उठा माहौल और चुटकुलों पर लगे ठहाके 



दुनिया का कोई इंसान प्रतिभाशून्य नहीं होता बस जरूरी होता है पारखी आँखों की और लोगों की सराहना की। कभी कभी पर्याप्त अवसर न मिल पाने की वजह से भी अनेक प्रतिभाएं खिलने के पहले ही कुम्हला जातीं हैं । इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए 'हमारे अलफ़ाज़" नाम के एक ग्रुप ने ओपन माइक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें भाग लेनेवाले युवाओं का उत्साह देखते बनता था ।

पिछले कुछ महीनों में देश भर में नयी पीढ़ी के युवा वर्ग में साहित्य और संस्कृति के प्रति रुचि  काफी बढ़ी है।  इस तथ्य को पूरी तरह से सिद्ध करता हुआ छात्रों द्वारा ओपन माइक का आयोजन हुआ जिसे दिनांक 17.02.19 को भी "हमारे अल्फ़ाज़" नाम के एक ग्रुप ने किया। इसके संस्थापक राजीव कुमार, मेराज और शिप्रा श्रीवास्तव हैं

आयोजन पत्रकार नगर, कंकड़बाग,पटना के गोल्डन गेट नामक स्थान पर हुआ। प्रतिभागियों ने अवसर का भरपूर उपयोग करते हुए बड़ी संख्या में छात्र- छात्राओं ने हिस्सा लिया और एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम को मनोरंजक और आकर्षक बनाने के लिए कुछ प्रतिभागियों द्वारा मशहूर गीत पेश किया गये तो कुछ  ने कामेडी कर सबको हँसाया। 

कार्यक्रम में शामिल मुख्य प्रतिभागियों में संस्कृति भारती,सुशांत सिंह ,मनोरंजन राज, साक्षी कुमारी , मीताली, केशव झा, रिया शर्मा ,पुजा तिवारी ,हीर, शताक्षरी ,गौरव सिन्हा ,रौनक़ सिंह ,पू जा कुमारी, प्रिंस के. राज, मनीषा कुमारी इत्यादि। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर मो. नसीम अख्तर ने की और मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं कवयित्री शाइस्ता अंजुम। संचालन संयुक्त रूप से मेराज और शिप्रा श्रीवास्तव ने किया।
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आलेख - मो. नसीम अख्तर 
छायाचित्र -हमारे अलफ़ाज़ 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com