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बिहार, भारत की कला, संस्कृति और साहित्य.......Art, Culture and Literature of Bihar, India ..... E-mail: editorbejodindia@yahoo.com / अपनी सामग्री को ब्लॉग से डाउनलोड कर सुरक्षित कर लें.

# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Monday, 18 November 2019

लेख्य मंजूषा द्वारा लघुकथा एवं काव्यपाठ का आयोजन 17.11.2019 को पटना पुस्तक मेला में संपन्न

 उनको तो बिरयानी मिलती / मुफ़लिस तेरा मुक़द्दर पानी 
लघुकथा पाठ में बच्चे भी शामिल 

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अभिव्यक्ति का कोमलतम माध्यम काव्य है तो सबसे तीक्ष्ण माध्यम है लघुकथा । कविता हवा में लहराते हुए आती है और पाठकों को हौले से अपने आगोश में ले लेती है वहीँ लघुकथा सीधा हमला करती है और कोई मुरव्वत नहीं करती।

17 नवम्बर 2019 पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान के राष्ट्रीय पुस्तक मेला में लेख्य मंजूषा द्वारा लघुकथा एवं काव्यपाठ का सुंदर आयोजन किया गया जिसने मंच पर उपस्थित अतिथियों श्रोताओं, साहित्यकारों तथा पुस्तक प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के अध्यक्ष डॉ. सतीशराज पुष्करणा ने किया ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ अनीता राकेश के साथ डॉ. विरेंद्र भारद्वाज की उपस्थिति में लेख्य मंजूषा के सदस्यों के अलावा किलकारी के बच्चों ने भी अपनी लघुकथा का पाठ कर आने वाले समय में हिंदी साहित्य तथा लघुकथा के सुंदर भविष्य का प्रदर्शन किया ।

इसमें रवि श्रीवास्तव,  संजय कुमार 'संज',  सुबोध कुमार सिन्हा, मो. नसीम अख्तर, अमृता सिन्हा, डॉ. कल्याणी कुसुम सिंह, पूनम कतरियार , मीनाक्षी सिंह, डॉ. प्रो. सुधा सिन्हा, सीमा रानी, प्रियंका श्रीवास्तव, राजकांता राज तथा रीता सिंह ने अलग-अलग विषयों पर पाठ किया।

लघुकथा पाठ के पश्चात काव्यपाठ में जिन्होंने अपनी रचना सुनाई उनमें प्रमुख रहे कवि संजय कुमार संज, गज़लकार सुनील कुमार, मो. नसीम अख्तर तथा सुबोध कुमार सिन्हा ।

सिद्धेश्वर प्रसाद की लघुकथा का शीर्षक था - "एक बेटे की कीमत".

श्रीमती कतरियार की लघुकथा का शीर्षक था - "अमर शहीद".

संजय कुमार ने पिछली बरसात में अप्रत्याशित मूसलाधार बारिश से मची तबाही का मंज़र रखा -
शहर बना समंदर पानी
कैसा था वो मंज़र पानी
उनको तो बिरयानी मिलती
मुफ़लिस तेरा मुक़द्दर पानी
उनकी हीं आंखों से उतरा
बेशर्मी बेगैरत पानी
पीने को नहीं मिलता पानी
सड़कों पे भर-भरकर पानी
प्रकृति से ही छेड़छाड़ का
है परिणाम भयंकर पानी

इस अवसर पर लघुकथा संग्रह "मुट्ठी में आकाश सृष्टि में प्रकाश" का लोकार्पण भी किया गया जिसका संपादन विभा रानी श्रीवास्तव ने किया है। लघुकथा का पाठ करनेवाले सभी साहित्यकारों को डॉ. सतीशराज पुष्करणा द्वारा "लघुकथा का सौन्दर्य" उपहार स्वरूप दिया गया.

इस अवसर पर डॉ. आलोक चोपड़ा, डॉ सविता सिंह नेपाली, कवि सिद्धेश्वर, कुमार गौरव , मृणाल आशुतोष, वीणाश्री  हेंब्रम के साथ अनेक श्रोता गण मौजूद रहे तथा कार्यक्रम का आनंद लिया।

मंच का संचालन अध्यक्ष विभा रानी श्रीवास्तव तथा धन्यवाद ज्ञापन रवि श्रीवास्तव ने किया।
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प्रस्तुति - बेजोड़ इंडिया ब्यूरो
मूल आलेख - संजय कुमार 'संज' / रवि श्रीवास्तव
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com





  









Sunday, 17 November 2019

प्रगतिशील लेखक संघ की कवि गोष्ठी पटना पुस्तक मेले में 17.11.2019 को संपन्न

सामाजिक समस्यों पर केन्द्रित कवितायेँ 

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प्रगतिशील लेखक संघ पटना इकाई के द्वारा पटना के गाँधी मैदान में लगे पुस्तक मेले के सभागार में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार आलोक धनवा ने की।
मुख्य अतिथि के रूप में लब्ध प्रतिष्ठ कवि मदन कश्यप आमंत्रित थे साथ ही प्रलेस पटना जिला इकाई की अध्यक्षा रानी श्रीवास्तव, अब्दुल बिस्मिल्लाह, कृष्ण कुमार, सत्येंद्र कुमार अनिल पतंग , रंजीत वर्मा ,पूनम सिंह, रमेश ऋतिम्भर, अरविंद श्रीवास्तव, एन के मधु , प्रभात सिंह , शिवदयाल और देवरिया (उoप्रo) से आये युवा कवि वेद प्रकाश तिवारी आदि कवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की।

राज किशोर राजन ने दिवंगत कवियित्री रश्मि रेखा की लिखित पुस्तक की पंक्तियों को दुहराया और साहित्य में उनकी सशक्त भूमिका पर प्रकाश डाला। फिर उन्होंने अपनी कविता 'विलाप' के द्वारा कर्महीन विधवा विलाप की तर्ज पर शोर मचानेवालों पर कड़ा प्रहार किया -
अब तुम कहोगे मर रही हैं नदियां
विलुप्त हो रहे तालाब,कुएं,वन,पशु–पक्षी
कट रहे जंगल और संताप से भरे
खड़े हैं पहाड़।
*शाम को शहर के न्यू मार्केट में उमड़ी
यह ठसा–ठस भीड़
लोगों की नहीं ,धन पशुओं की हैऔर यह समाज
पाउडर ,क्रीम लगाया
बजबजाता हुआ सूअर का खोभाड़ है।
*अब तुम कहोगे, देखो न!
शहर के इने–गिने, नामी–गिरामी बुद्धिजीवी
अलग–अलग विषयों पर छांट रहे व्याख्यान
उनमें एक से बढ़ कर एक मोटे ताज़े सत्ता के जोंक
अपनी सुविधा के लिहाज़ से
चुन लिए हैं पक्ष –प्रतिपक्ष
वो भी सिर्फ दिन भर के लिए
रात को आ जाते अपने –अपने बिल में।
*अब तुम कहोगे कितना निर्लज्ज और क्रूर समय है
कि स्टेशन के पीछे रहनेवाली
चार–पांच वेश्याएं
एक दूसरे को फूटी आंख न सुहाने पर भी
इन दिनों खौफ से बहनापा निभाते
रहने लगीं हैं साथ–साथ।
*अब तुम कहोगे,मुक्त व्यापार के साथ
इस देश में सब कुछ होता जा रहा मुक्त
वहीं  विचारों पर क्यों पसरती जा रही घास–पात
एक अघोषित समझदारी विकसित हो गई है
हम बोलते रहेंगे, लिखते रहेंगे, परिवर्तन के पक्ष में
पर खूंटा हमारा जस का तस रहेगा।
*ऐसे ही तुम कहोगे और भी बहुत कुछ
और फिर कहोगे
हम लोग कर है सकते हैं।
*पहली बार नदियों के सूखने
बजबजाते सूअर के खोभाड़
और उन वेश्याओं के नकली बहनापे से
बुरा लग रहा तुम्हारा विलाप।

कवि अनिल पतंग ने "दांत के डॉक्टर" शीर्षक कविता के द्वारा अराजकता पर व्यंग प्रस्तुत किया।

कवियित्री रानी श्रीवास्तव ने नारी की प्रासंगिकता पर लिखी अपनी रचना 'श्रद्धांजलि' के माध्यम से दिवंगत कवयित्री रश्मि रेखा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की -
घर की चीजों को खोजते-खोजते
ढूँढने लगती हूँ / कभी तुम्हें भी
तुम जो गम हो गए हो
अनंत की खामोशियों में

कवि कृष्ण कुमार, सत्येंद्र कुमार ने जल और पर्यावरण से जुड़ी कविताएँ प्रस्तुत की।

कवि वेद प्रकाश तिवारी ने "सत्ता" शीर्षक कविता में बालात्कार जैसे कृत्य होने वाली सियासत पर चोट किया। वे कहते हैं --
आदर्श, मर्यादा, कानून और परिधि के बीचो   
कुछ दरिंदों का शिकार हो जाती हैं बालायें
जब समाज माँगता है न्याय
तो कुछ विचारधाराएँ
हो जाती हैं मौन।

अंत में वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने भारत माता की जय शीर्षक कविता सुनाकर भारत की  गरीब बेटियों  के दर्द को जन-जन तक पहुँचाने की कोशिश की ।

अपने अध्यक्षीय भाषण में आलोक धन्वा  ने कविता के मानक और निष्पक्षता पर प्रकाश डाला तथा एक कविता के माध्यम से सबको जागरूक करने का प्रयास किया।

कार्यक्रम का संचालन राजकिशोर राजन ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में दिवंगत लेखिका रश्मि रेखा और महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को श्रद्धाञ्जली दी गई । उसके बाद रचनाकारों ने अपनी- अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की । कवि गोष्ठी में खास बात यह रही कि सभी कवियों ने सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित कविताओं का वाचन किया ।
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रपट - वेद प्रकाश तिवारी 
छायाचित्र - वेद प्रकाश तिवारी 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com
नोट- इस कार्यक्रम में शामिल कविगण कृपया अपनी पंक्तियाँ दें।













Saturday, 16 November 2019

संगीत शिक्षायतन द्वारा बाल दिवस (14.11.2019) को पटना में पर नृत्य उत्सव प्रस्तुत

बाल दिवस पर नृत्य और नृत्य नाटिका प्रस्तुत 
प्रत्येक बच्चा जन्मजात आशावादी होता है
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भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस (14 नवम्बर) पर देश भर में हर साल बाल दिवस मनाया जाता है क्योंकि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था

बच्चे एक बगीचे में कलियों की तरह होते हैं और उन्हें सावधानीपूर्वक और प्यार से पोषित किया जाना चाहिए,क्योंकि वे राष्ट्र और कल के नागरिकों के भविष्य हैं। जिस तरह से वह अपने बच्चों के साथ व्यवहार करता है। प्रत्येक बच्चा जन्मजात आशावादी होता है; वह सुनहरे सपने देखता है।

उनकी आशाओं को पंख देते हुए 14 नवम्बर की संध्या से संगीत शिक्षायतन की ओर से "बाल दिवस" के अवसर पर सभी शिक्षार्थियों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सभी बच्चे सज-धज अपनी अपनी प्रस्तुति के लिए उत्सुक नजर आए। 

कृष्ण वंदना से सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत की गई। उसके बाद कथक नृत्य शैली में तराना, दर्शकों को झुमा देने वाला अनेक फ़िल्मी गीतों पर भी नृत्य प्रस्तुत किये गए

बाल दिवस के अवसर पर बाल शोषण के विषय पर चोट पहुंचने वाली नृत्य-नाटिका  "बाल मजदूरी और बाल विकास" किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी और उपस्थित दर्शक गण ने बाल सुरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की इस शुभ अवसर पर अंजू महेंद्रू  (अध्यक्ष, इनर व्हील क्लब, नव्या, कंकड़बाग) द्वारा शिक्षायतन को कॉलर प्रिंटर मशीन उपहार स्वरूप प्रदान किया गया।

भाग लेने वाले कलाकार थे - अदिति, स्नेहा, रंभू, अरनव, नंदिनी, निशित, कौस्तुभ, प्रिया, हर्षिता, सानिया, नंदिनी आदि।

उपस्थित गणमान्य लोगों में थे - श्रीमती रेखा शर्मा (सचिव, शिक्षायतन), श्रीमती अंजू महेंद्रू (अध्यक्ष, इनर व्हील क्लब नव्या), श्री रूपेश कुमार रंजन ( मंत्री संगठन, संस्कार भारती, पटना), कथक नृत्यांगना सुश्री यामिनी। कार्यक्रम  संयोजन, डांस कोरियोग्रफर रवि मिश्रा द्वारा सफलता पूर्वक किया गया।

मूल आलेख - यामिनी
(चीफ ट्रस्टी) संगीत शिक्षायतन
पता -  काली मंदिर रोड, हनुमान नगर,  कंकड़बाग, पटना 20
आलेख प्राप्ति माध्यम -  मधुप चन्द्र शर्मा 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com










'आगमन' की कवि गोष्ठी 15.11.2019 को पटना पुस्तक मेले में सम्पन्न

अहंकार जब होम हुआ /  पत्थर पत्थर मोम हुआ 

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दिनांक 15.11.2019 को पटना के राष्ट्रीय पुस्तक मेले के मुक्ताकाशी मंच पर 'साहित्यिक संंस्था 'आगमन' द्वारा एक कवि गोष्ठी सम्पन्न हुई. इसमें शहर के अनेक जाने-माने कवि-कवयित्रियों ने भागीदारी निभाई. मंच संचालन संस्था की सचिव वीणाश्री हेम्ब्रम ने किया.

शायर नीलांशु रंजन पूरे रूमानी अंदाज़ में दिखे -
उस रात / चांद को निहारते हुए
तुम्हारे कांधे पर झुककर
उंगलियों से तुम्हारी ज़ुल्फों को लपेटते हुए.

पंकज प्रियम भरी महफिल में दार्शनिक होते दिखे -
मिट्टी हो दीवार हो, जानते हो स्रोत है कहाँ
बस धरती - जहाँ जन्म लेते हैं अवसान

वीणाश्री हेम्ब्रम ने एक नई भाषा सीख ली है इन दिनों - मौन की भाषा  ‌‌
कुछ शब्द हैं कुछ् मौन हैं
तुम्हारे लिए हैं ये  / अगर समझो तो..

आराधना प्रसाद में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी है -
हमारा देश प्यारा है / जहाँ से ये निराला है

सुनील कुमार तो वैसे भी श्रृंगार रस  के कवि  माने  जाते  हैं.  वे  फरमाते  हैं  -
नजर  का  इंतखाब  तुम  /  हसीं  लाजवाब  तुम

चैतन्य चन्दन के  हाथ  जब  प्रेमिका का पुराना ख़त आ ग़या तो उन्हें दर्द में भी मुस्कुराना आ गया  -
हाथ मेरे ख़त पुराना आ गया / याद वो गुजरा ज़माना आ गया
हर सितम मंजूर है अब मुझे / दर्द में भी मुस्कुराना आ गया

कल्याणी कुसुम ने मिलकर  फ़ोनों पक्षों को  मिल-जुलकर बदलने की बात की  -
कुछ तुम बदलो / कुछ हम बदलें

शुभ चन्द्र झा  को अंधेरों से  डर  लगने लगा है इसलिए वे -
मुझे शहर तक ले चलो
मुझे अंधेरों से डर लगाने लगा है

डॉ.  पुष्पा जमुआर ने कश्मीर की ओर ध्यान दिलानेवाली कविता सुनाई.
पूनम सिन्हा ने पत्थर-पत्थर को मोम कर दिया -
अहंकार जब होम हुआ / पत्थर पत्थर होम हुआ

इस कार्यक्म में अपनी रचना पढ़नेवाले कविताओं में अमित कु. आजाद, डॉ.  सरिता  गुप्ता,  डॉ.  एम्.  के  मधु,  नेहा  नुपूर,  चैतन्य घनश्याम,  विभूति कुमार,  अर्जुन कु. गुप्ता, श्रीकांत व्यास और  ज्योति मिश्रा ने अपनी कविताएँ सुनाकर इस कवि- गोष्ठी को  जीवंत कर  दिया.

दर्शाकगण हर पाठ पर तालियाँ बजाकर अपनी सहमति और सराहना का जोरदार तरीके  से इजहार करते रहे.

अंत में वीणाश्री हेम्ब्रम ने धन्यवाद  ज्ञापन करके कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की.
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आलेख -  वीणाश्री  हेम्ब्रम 

छायाचित्र सौजन्य - वीणाश्री  हेम्ब्रम
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com

















Friday, 15 November 2019

पुस्तक मेले की गतिविधियों का नवीनतम समाचार - सीआरडी पटना पुस्तक मेला, 8 से 18 नवंबर, 2019

पुस्तक मेले के नवीनतम समाचारों को नीचे देखिए. अपना समाचार भेजिए जल्दी एक फोटो के साथ.

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नोट - कृपया अपने समाचार एक या कुछ चित्रों के साथ ईमेल से भेजिए - editorbejodindia@yahoo.com // हमारे मित्र मुझे फेसबुक मेसेज में भी लिंक भेज सकते हैं.
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Talaat Parveen ke she'ri majmua Adhure Khwab ke rasme ijra ke mauqe par samman hasil karte hue (Info courtesy - Sri Ramesh Kanwal)

#मुक्तिबोध_जन्मशती_वर्ष पर विशेष // आज #पटना_पुस्तक_मेला में #जनशब्द द्वारा आयोजित #कविता_पाठ में कविमित्रों का इंतज़ार रहेगा।#समय : 2.15 बजे दिन #तिथि : 16 नवंबर, 2019 (शनिवार) #स्थान : पटना पुस्तक मेला, गांधी मैदान, पटना // मुख्य-अतिथि : #आलोकधन्वा / #मदन_कश्यप // अध्यक्षता :#प्रभात_सरसिज // संचालन : #राजकिशोर_राजन // मुक्तिबोध पर वक्तव्य :#राणा_प्रताप //आग्रह,#शहंशाह_आलम // मोबाइल : 9835417537।
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आज दिनांक १६.११.२०१९(शनिवार) को नेशनल बुक ट्रष्ट द्वारा पटना के गाँधी मैदान में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में समाज को जागृत करती पटना की साहित्यिक संस्था लेख्य-मंजूषा के बैनर तले दोपहर १.३० बजे से ३ बजे तक मेरा एकल काव्य-पाठ निर्धारित है। इसमें पटना व आसपास के आप सभी मित्र अहबाब की उपस्थिति सादर प्रार्थित है। इस दौरान फेसबुक के मेरे पटना से बाहर के मित्रों के लिए जिनकी उपस्थिति संभव नहीं हो पाएगी मैं अपने फेसबुक एकाउंट से लाइव भी उपलब्ध रहूँगा, कार्यक्रम के प्रसारण के साथ, आप अवश्य जुड़ें। (सुनील कुमार)
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चित्र साभार - कुन्दन आनन्द
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#पटना_पुस्तक_मेला में कल यानी 15.11.2019  को -१#पेपरबैक_संस्करण #यक्षिणी : चर्चा का एक और दौर // शिरकत : अलोकधन्वा, Premkumar Mani, अवधेश प्रीत Santosh Dixit और Anish Ankur // सामईन : Sanjaykumar Kundan, भावना Bhavna Shekhar, त्रिपुरारी शरण, Taranand Viyogi, Vinod Anupam // Ratneshwar Singh और नगर के अन्य काव्यप्रेमी! // दर्जन भर से ज़्यादा प्रतियों पर हस्ताक्षर करना सुखद लगा। // एक पाठक ने कहा - बहुत सुंदर कृति और सिर्फ़ १५० रुपए में १५० पेज! कितना सस्ता भी ! (पोस्ट साभार - विनय कुमार)

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पुस्तक मेले में आज (15.11.2019) दैनिक जागरण के कार्यक्रम में 'रचनाशीलता की नई पौध' विषय पर कुमार रजत के सवालों का जवाब देते मित्र नताशा और नरेंद्र कुमार के साथ प्रत्यूष चंद्र मिश्र ( चित्र सौजन्य - प्र. चंद्र मिश्र)
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आगमन की गोष्ठी 15.11.2019

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चित्र सौजन्य - कुमार पंकजेश