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बिहार, भारत की कला, संस्कृति और साहित्य.......Art, Culture and Literature of Bihar, India ..... E-mail: editorbejodindia@yahoo.com / अपनी सामग्री को ब्लॉग से डाउनलोड कर सुरक्षित कर लें.

# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Friday, 17 May 2019

संगीत शिक्षायतन में कला-प्रवाह-4 के अंतर्गत एक दिवसीय मूक-अभिनय कार्यशाला 12.5.2019 को पटना में सम्पन्न

प्रसिद्ध माइम कलाकार कमल नस्कर मूक अभिनय के गुर सिखाये
डॉ. शम्भू कुमार सिंह ने भी नृत्य संगीत की खूबियाँ गिनाईं




पटना रविवार 12.5.2019 को पटना के संगीत शिक्षायतन में कला प्रवाह- 4 कार्यक्रम के अन्तर्गत एक दिवसीय मूक अभिनय कार्यशाला तथा नृत्य संगीत  पर अन्योन्यक्रिया में लगभग 75 शिक्षार्थियों ने भाग लिया।

जैसा कि आपको पता है, 5 मई को पटना की संगीत शिक्षायतन संस्था ने अपना स्थापना दिवस पर परवाज़ कार्यक्रम के अन्तर्गत 30 निम्न आर्थिक वर्ग के बच्चों को नृत्य, चित्रकला और मार्शल आर्ट की शिक्षा देने की शुरुआत की उन बच्चों को विधिवत रूप से सिखाते हुए मंच कला और डिग्री प्रदान करने का सफल प्रयास शुरू किया।

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इस रविवार 12.5.2019 को साथ प्रसिद्ध माइम कलाकार कमल नस्कर (मॉडर्न सेंटर, कोलकाता) शिक्षायतन प्रांगण में मूक अभिनय के गुर सिखाये। जिसमें शिक्षार्थियों ने चेहरे के भाव,  शारीरिक भाव भंगिमा, अवरोधन चरित्र निभाने की कला को माइम के माध्यम से बखूबी बताया। बच्चो ने एक एक मुद्राओं को देख उत्साहित होते और लगातार तालियां बजते रहे। कमल नस्कर ने उत्साहवर्धन और भविष्य में कला के उपयोग को अपनाने की सलाह दी। साथ ही यह चिंता दर्शाई कि पिछले 10 वर्षों से वो पटना आ रहे है, लेकिन यहां लोग कला करना तो चाहते है परन्तु सीखना नहीं चाहते। इसलिए पटना में भी नियमित रूप से माइम की क्लासेज होनी चाहिए तथा स्कूल में भी विधिवत सिखाया जाना चाहिए। हालाकि शिक्षायतन पिछले 10 वर्षों से इस कोशिश में अनवरत प्रयासरत है। शिक्षायतन संस्था का संरक्षक होने के नाते वे हमेशा माइम की शिक्षा देते रहेंगे।  यामिनी एक अच्छी बेहतरीन कथक नृत्यांगना के साथ उच्च कोटि की कलाकार है। समाज में कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए शिक्षायतन लगातार कई आयोजन करती रहती है। माइम करने वाले शिक्षार्थियों का यहां एक छोटा सा ग्रुप है। जो सीखते और प्रदर्शन भी करते है। एक अच्छी बात ये है कि यामिनी न केवल माइम के कलाकारों को बल्कि अभिनय, नृत्य, चित्रकला के भी शिक्षार्थियों को भी माइम सीखने को प्रेरित करती है।

साथ ही डॉ० शंभू कुमार सिंह (स्टेट कन्वेनर स्पीक मैके) संगीत नृत्य  के विषय में शिक्षार्थियों को जानकारी दी। नृत्य ,संगीत तो पहले हमें संस्कारित करता है । मन के कलुष को खत्म करता है । शरीर को भी विषरहित करता है । हमें सत्य से साक्षात्कार कराता है । जब हम निर्मल हो जाते हैं । आत्मा विमल हो जाती है तो हमारा कर्म भी विमल हो जाता है । आज जो समाज में कलुषता है , गंदगी है उसका मूल कारण यह है कि हम संस्कृति से दूर हो गए हैं ।  एक स्वच्छ दुनिया बनानी हो तो हमें नृत्य, संगीत से नेह जोड़ना पड़ेगा । 

कार्यक्रम की शुरुआत में संस्था की सचिव  रेखा शर्मा ने आगत सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता यामिनी (कथक नृत्यांगना) ने कथक नृत्य द्वारा अभिनय, नाटक के अभिनय और माइम एक्टिंग (मुकाभिनय) को प्रायोगिक रूप में कर के दिखाया। साथ ही कला प्रवाह के उद्देश्यों को बताया कि कला का विस्तार प्रसार सभी के हृदय में होना आवश्यक है। कोई जरूरी नहीं कि प्रशिक्षु प्रदर्शन ही करें। बल्कि वे सीखें, समझें और आत्मसात कर जीवन को सरल और कलात्मक बनाएँ।

कला और साहित्य अनुरागी , पूर्व बैंक अधिकारी जय शंकर प्रसाद भी इस कार्यक्रम में पुष्पा प्रसाद (सामाजिक कार्यकर्ता) के साथ उपस्थित थे । उन्होंने ने भी बच्चों को संबोधित किया । अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि एकाग्रता और अभ्यास से हम कला के क्षेत्र में ऊंचाइयां छू सकते हैं । श्री प्रसाद ने बच्चों को यह भी कहा कि आपही भारत के भविष्य हैं और आप को एक बेहतरीन नागरिक होने के लिए कला और संस्कृति से जुड़ाव होना चाहिए।

शांभवी वत्स की  मनमोहक वाचन शैली में उद्घोषणा दर्शकों के बीच काफी सराहनीय रहा। अंत में केंद्राधीक्षक रुधीश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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आलेख - यामिनी 
छायाचित्र सौजन्य - संगीत शिक्षायतन
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com


 





Monday, 6 May 2019

संगीत शिक्षायतन के स्थापना दिवस पर 5.5.2019 को पटना में तीस बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देना प्रारम्भ

कला सीखना करना स्वयं को सशक्त करने का एक माध्यम है




संगीत शिक्षायतन के स्थापना दिवस के दिन 30 निम्न आर्थिक बच्चो को कला शिक्षा, मंच कला व विधिवत डिग्री प्रदान करने का सफल प्रयास शुरू किया गया।

समाज के विकास और मानव जनकल्याण के लिये शिक्षा बहुत जरूरी है, और कला शिक्षा भी।  सीखने सिखाने के इसी उद्देश्य को लेकर आज ही के दिन 5 मई वर्ष 2000 को कथक नृत्यांगना यामिनी ने 3 बच्चों के साथ अपने सपनों को साकार करने पंख फैला उड़ान भरी थी । हौसलों के कदम बढाते बढाते आज शिक्षायतन प्रांगण में एक बड़ा परिवार एक साथ कला कौशल को सीख, समझ और समाज में प्रसारित कर रहे हैं।

आज से अपनी इस स्थापना दिवस में 30 गरीब बच्चों को नृत्य, चित्रकला, मार्शल आर्ट की निशुल्क शिक्षा देने जा रही है। इस उद्देश्य से कि की आने वाले समय में यह अपने पैरों पर खड़े हो सके और समाज में अपनी पहचान बना सके। वो अपने सपनों की उड़ान भर सकें और इस समाज में अपना योगदान दे सके। 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वल्लन से विधिवत की गयी। जिसके बाद संस्था की चीफ ट्रस्टी यामिनी ने इस कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व बताया।

सभी शिक्षार्थियों ने अपने हांथ में मोमबत्ती जलाकर जीवन में कुछ अच्छा करने का प्रण लेते हुए" हमको मन की शक्ति देना" प्रार्थना गीत गाया। विशिष्ट अतिथि  अवधेश झा योगाचार्य ने बच्चों में संस्कार स्वरूप को प्रयोगात्मक रूप में योग विधि के आधार पर बताया। कला सीखना और ग्रहण करना स्वयं को सशक्त करने का एक माध्यम है।

संस्कार भारती संस्था के रूपेश कुमार सिन्हा तथा प्रवीर कुमार ने बच्चो को कला को सीखने और आत्मसात करने की शिक्षा दी तथा "कर लो कुछ कर लो, कुछ सीख लो तुम सब आज" गीत को साथ साथ सभी बच्चो ने दोहराया। 

कोकुसाई शितो रू कराटे डो ऑर्गनाइजेशन इंडिया (kokusai shito Ryu karate-do organization, India) सेमार्शल आर्ट प्रशिक्षक सुशील कुमार (एसकेडी के चीफ) तथा सलाज कुमार (एसकेडी के तकनीकी प्रभारी) ने स्वयं की रक्षा और सुरक्षा करने के आयामों से परिचय कराया तथा मार्शल आर्ट को अपनाना और उपयोग की बारीकियों को समझाया।

इस समारोह के विशिष्ट गण  अर्थात 30 शिक्षार्थियों  में संस्था की सचिव रेखा शर्मा तथा नन्हे सदस्य रूद्र के हांथो, घुँघरू, यूनिफार्म आदि बाँटे गये। संस्था के केंद्राधीक्षक रूधीश कुमार ने बच्चो को कला शिक्षा, मंचकला के साथ साथ विधिवत डिग्री प्रदान कराने को आश्वस्त किया।

शिक्षार्थियों ने शिक्षायतन परिवार व कला से जुड़ी अपनी भावनाओं को सबके समक्ष रखा। उन्होंने कहा सीखने और कुछ करने की इच्छा उन्हें भी होती है लेकिन घर से अनुमति नहीं मिल पाती और हमेशा कुछ काम करने को कहा जाता है। बच्चों ने यह भी बताया कि कभी कभी वह खुद से जमीन पर ईंट के सहारे चित्रकारी करते हैं और उन्हें यह करते हुए भी बहुत अच्छा लगता है। कुछ बच्चों ने यह भी बताया की नृत्य करना और नृत्य ही करते रहना उनका सपना है। इसलिए कभी-कभी मोबाइल पर गाने बजा कर हम सब डांस कर लेते हैं। इस अवसर पर अतिथि  रमेश पोपली , प्रीति सिंह, तथा  अंजू महेंद्रा सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। 

कार्यकर्म का संचालन  पूजा चौधरी ने अपनी कला कौशल के साथ बेहतरीन तरीके से संचालित किया। अंत में शिक्षायतन की चीफ ट्रस्टी ने सभी बच्चो अतिथियों और दर्शकों को सहृदय धन्यवाद ज्ञापन किया।
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आलेख - यामिनी 
छायाचित्र सौजन्य- संगीत शिक्षायतन 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com




 

Sunday, 28 April 2019

विश्व नृत्य दिवस के एक दिन पूर्व संगीत शिक्षायतन द्वारा 28.4.2019 को पटना में कार्यक्रम सम्पन्न

जीवन के लिए गति और लयबद्धता अनिवार्य



इस निस्सार जीवन में जब तक प्रेम का समावेश नहीं होता तब तक उसका कोई अर्थ नहीं और प्रेम बसता है सौंदर्य में. ध्वनि में सौंदर्य का अंवेषण संगीत और गति में नृत्य कहलाता है. जिस तरह से जीवन का सार प्रेम है उसी तरह से ध्वनि का लय  और गति का नृत्य.

विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर एक दिन पूर्व नृत्य संगीत को समर्पित संस्था संगीत शिक्षायतन में नृत्य की विभिन्न शैलियों में नृत्य कर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ मनाया गया। 

सबसे पहले कार्यक्रम की शुरुआत में दीप प्रज्वलन से हुई जिसमें नृत्य विधा में संस्था से शिक्षा प्राप्त किए शिक्षार्थियों द्वारा संस्था की गरिमा को बनाए रखते हुए दीप ज्वलित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति में शिक्षायतन अपनी दोनों साधना केंद्र पटना सिटी तथा कंकड़बाग के कलाकारों द्वारा एक से बढ़कर एक नृत्य की प्रस्तुतियां देते रहे जिसमें गुरु वंदना, कथक शैली में सूफी नृत्य, फिर फ्री स्टाइल, कंटेंपररी, हिप हॉप, वाॅलीवुड मिक्स गानों पर दर्शकों की तालियां बजती रही। "कोर रंग दे" राजस्थानी और "साई मोरा सैयां" भोजपुरी गाने ने नृत्य की लोक छटा से प्रांगण में मिट्टी की सौंधी खुशबू बिखेर दी। सभी नृत्य का संयोजन कथक नृत्यांगना यामिनी तथा नृत्य प्रशिक्षक रवि मिश्रा द्वारा दमदार कोरियोग्राफी का नमूना पेश हुआ।

आंगिकम भुवनम, यश्य वाचकम,सर्व वाङ्मयम, आहार्य चन्द्र ताराधि, तं नुम:( वन्दे) सात्विकम।
कथक नृत्यांगना यामिनी शर्मा ने श्लोक का अर्थ बताते हुए इसके भाव को मुद्राओं द्वारा स्पष्ट किया। ॐ के साथ शिव की उत्पत्ति हुई ।डमरु, नाद का प्रतीक है और नाद संगीत है। नटराज की लय बद्ध ता  नृत्यरत  स्थिति स्वयं में ब्रह्मांड की लय बद्धता की उद्घोषणा करती हैं। बिना गति के कोई भी जीवन नहीं और जीवन के लिए लयबद्धता अनिवार्य है।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कार भारती पटना इकाई के श्री प्रवीर कुमार , श्री रूपेश कुमार सिन्हा तथा श्री अवधेश झा ( कवि व लेखक) उपस्थित थे। *श्री अवधेश झा ने शिव पुराण के अनुसार नटराज का अर्थ और नृत्य के होने का सार बताया । अज्ञानता को सिर्फ ज्ञान, नृत्य, संगीत से दूर किया जा सकता है, जिसका सूचक नटराज है। नाट्य शास्त्र में उल्लेखित संगीत, नृत्य, व्याकरण अभिनय सभी के प्रणेता शिव है। सभी नृत्य का स्रोत तांडव है।

संस्था की सचिव रेखा शर्मा की अध्यक्षता में कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किया गया। नृत्य कलाकार थे - सौम्या,अनन्या,अदिति,रोहित,सिमरन, आरव,अलीशा, आकृति, आर्णा,संजना, कृति, आरोही, अनुष्का, सुहानी आदि नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां दी। तथा केंद्राधीक्षक श्री रूधीश कुमार ने कलाकारों के उत्साह वर्धन में उनके नृत्य को जीवन के विभिन्न आयामों से जोड़ते हुए नृत्य और जीवन की सार्थकता में नृत्य की महत्वपूर्ण भूमिका को बताया। 

कार्यक्रम के अंत में श्री रवि मिश्रा  (केंद्र प्रमुख ,शिक्षायतन पटना सिटी) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
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आलेख - बेजोड़ इंडिया ब्यूरो
छायाचित्र सौजन्य - यामिनी
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Friday, 19 April 2019

विश्व विरासत दिवस पर इंटैक, पटना संग्रहालय, मैथिली साहित्य संस्थान और अन्य का संयुक्त कार्यक्रम पटना में 18.4.2019 को संपन्न

बिहार की अनेक धरोहरों को विश्व धरोहर का दर्जा मिले



विश्व के इतिहास में बिहार का महत्वपूर्ण योगदान है. यहाँ के अनेक भग्नावशेष प्रागैतिहासिक से लेकर उत्तरोत्तर कालों में मानव की विकास यात्रा के उत्थान और पतन को रेखांकित करते हैं. जहाँ जहानाबाद जिले का बराबर और नागार्जुनी गुफा अत्यंत प्राचीन होने के कारण अमूल्य है वहीं शेरशाह का मकबरा अपने सौंदर्य में ताजमहल को टक्कर देने के लायक है. रोहतासगढ़ का भव्य किला, सप्तपर्णी गुफाएँ और राजगीर की अतिविशाल दिवारें  बिहार और भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया की धरोहर है. इन सब को विश्व विरासत का दर्जा मिलना चाहिए.

18.4.2019 को पटना संग्रहालय के सभागार में आयोजित संगोष्ठी में एक से एक बड़े विद्वान इकट्ठे हुए और बिहार के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों और अन्य निर्माणों आदि के संरक्षण के बिंदु पर गहन चर्चा का दौर चला. इसमें डॉ. चितरंजन प्रसाद, डॉ. जे.के.लाल, प्रेम शरण, डॉ. विमल तिवारी, डॉ. रत्नेश्वर मिश्र, डॉ. उमेश चंद्र द्विवेदी, विवेकानंद झा, गजानन मिश्र आदि ने अपने विचार व्यक्त किये. सुश्री गार्गी और मनीष ने इस विषय पर छायाचित्र प्रस्तुत किये. 

इस आयोजन में उमेश मिश्र, डॉ. बी.के.कर्ण, दिनेश चंद्र झा, राम सेवक राय, के.के.शर्मा, डॉ. शंकर सुमन, किरण कुमारी, निभा लाल, अरबिंद कुमार, डॉ. इंद्रकांत झा, वीरेंद्र झा, विजय श्रीवास्तव, दीपक ठाकुर, सादिक हुसैन, अमरनाथ झा आदि भी उपस्थित थे.

संस्कृतिविद और इतिहासकार भैरब लाल दास ने स्वागत भाषण किया और धन्यवाद ज्ञापन दरभंगा के संग्रहालय के क्यूरेटर शिव कुमार मिश्र द्वारा क्या गया. 

बिहार की सभ्यता, संस्कृति के प्राचीन संवाहक इन विश्व स्तर के धरोहरों के संरक्षण की चिंता और उस दिशा में प्रयास अत्यंत आवाश्यक है. उस दिशा में किये गए इस संगोष्ठी के प्रयास की सराहना की जानी चाहिए.
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आलेख- हेमन्त दास 'हिम'
छायाचित्र सौजन्य - शिव कुमार मिश्र
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Thursday, 18 April 2019

मधुबनी में "लोक कला कृति" मधुबनी पेंटिंग संस्थान के तत्वावधान में 17.4.2019 को एक चित्रकला पर संगोष्ठी आयोजित

राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त श्री दास पुष्कर जी   ने सभी प्रतिभागियों को पेंटिंग का टिप्स सिखाया



मानव प्राण कलाओं के विविध स्वरूप में बसता है. उसके अलावा तो वह मानव है ही नहीं यंत्र है अथवा पशु है। और कलाओं में लोककला जन जीवन से सीधा सरोकार रखनेवाली कला होने के कारण अत्यधिक दीर्घजीवी होती है जो सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती है।

17.4.2019 को "लोक कला कृति" मधुबनी पेंटिंग संस्थान के तत्वावधान में एक चित्रकला के उपर संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें अनेक सुधी कलाकारों ने भाग लिया. इनमें सम्मलित थीं मंजू झा, सरिता झा, शिल्पी झा, सुरभी कुमारी, बबली कुमारी, साक्षी, अंजली ठाकुर, विन्नी विजेता, बबली कुमारी, वैभवी और कांति सिंह तथा उनके साथ संस्था की संचालिंका नूतन बाला ने भाग लिया, 

नूतन जी देश के विभिन्न संस्थाओं जैसे ललित कला अकादमी, भारतीय रेलवे एवं लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय के द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम में सहभागी रही है।  समय-समय पर लोक कलाकृति के द्वारा देश के विभिन्न प्रांतों में प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमे राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त श्री दास पुष्कर जी   ने सभी प्रतिभागियों को पेंटिंग का टिप्स सिखाया। 

सभी प्रतिभागी अपनी शंकाओं  का समाधान लिया। अंत में श्री डी. कुमार सब को धन्यवाद देते हुए सेमिनार का समापन किया ।

इस तरह के आयोजन सतत होते रहने चाहिए ताकि हमारी लोककला जीवित रहे और लोकजीवन तमाम कठिनाइयों और अभावों के बावजूद भी एक आंतरिक उल्लास से परिपूर्ण रहे।
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आलेख - चंदना दत्त
जिला - मधुबनी
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Sunday, 7 April 2019

जनता दरबार - शंभू पी. सिंह के कथा-संग्रह पर किरण सिंह द्वारा चर्चा

सामाजिक तंत्र को नंगा करनेवाली कहानियाँ



हमारे आसपास के वातावरण में कई तरह की घटनाएँ घटित होती रहतीं हैं जिसे देखकर या सुनकर हमारा संवेदनशील मन कभी हर्षित होता है तो कभी व्यथित और फिर कभी अचंभित भी। और फिर हम मानव के स्वभावानुरूप अपने अपनो, इष्ट मित्रों, पड़ोसियों आदि से उस घटना की परिचर्चा करके अपनी मचलती हुई संवेदनाओं को शांत करने का प्रयास करते हैं। किन्तु एक लेखक का मन सिर्फ परिचर्चा करने मात्र से शान्त नहीं होता बल्कि उसकी तो नींद, चैन सब छिन जाता है।

घटनाएँ सोते - जागते मस्तिष्क पटल पर मंडराने लगतीं हैं, लेखनी मचलने लगती है, शब्द चहकने लगते हैं और फिर  लिखी जाती हैं कहानियाँ। शायद ऐसा ही कुछ घटित हुआ होगा वरिष्ठ कथाकार शम्भू पी सिंह जी के इर्द - गिर्द और उनकी लेखनी चल पड़ी होगी। वैसे उन्होंने अपने उत्तर कथन में इस बात को स्वयं स्वीकारा भी है कि देखी सुनी घटनाओं ने शब्द दिये और कथा का प्रवाह बना रहे इसलिए कल्पना का भी सहारा लिया। 

शम्भू पी सिंह की कथा संग्रह जनता दरबार का कवर पृष्ठ अपने नाम के अनुरूप ही सुन्दर एवम् सजीव है जिसमें कुल तेरह कहानियाँ संग्रहित हैं। 

इस संग्रह में अधिकांश कहानियाँ सामाजिक मूल्यों को तिलांजलि देती हुई स्त्री - पुरुष के अंतरंग सम्बन्धों पर आधारित है जिसमें लेखक  ने खूबसूरती से कथानक को पिरोया है और अंत तक कौतूहल बनाए रखा है जो पाठकों को बांधने में पूरी तरह से समर्थ और सक्षम है। 

अक्सर स्त्री - पुरुष से सम्बन्धित कहानियों में महिलाओं की स्थिति पीड़ित, शोशित  दयनीय तथा  छली हुई दिखाई जाती है लेकिन इस संग्रह की अधिकांश कहानियों में लेखक ने महिलाओं के द्वारा पुरुषों को ठगा हुआ तथा छला हुआ दिखाया है। जैसे आज के आधुनिक युग में  सामाजिक मूल्यों को तर्क के साथ तोड़ती हुई  "बायोलाॅजिकल नीड्स" में  स्त्री के द्वारा ही स्त्री के परम्परागत चरित्र पर अट्हास करते हुए अवैध सम्बन्ध को एक शारीरिक आवश्यकता बताया गया है । 

"तोहफ़ा" में सलील और स्नेहा के दाम्पत्य प्रेम को खूबसूरत सम्वादों के माध्यम से बहुत  खूबसूरती से उकेरा गया है। दोनों में प्रेम की पराकाष्ठा है  लेकिन स्नेहा के कोख में उसके अतीत का बच्चा यह सुन कर सलील अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहा है । कहानी तृष्णा में चित्रा के चरित्र को भी आवश्यकतानुसार एक से अधिक पुरुषों को प्रेम में फांस कर छलते हुए लिखा गया है। 

लेकिन लेखक ने पुरुष होते हुए भी एक महिला की पुरुषों के द्वारा बाल्यावस्था से लेकर उम्र के ढलान तक यौन शोषण की बारीकी से कथानक पेश करके पाठकों के मन में  पुरुषों के प्रति पक्षपात वाली अवधारणा को सिरे से खारिज तो कर ही दिया साथ ही "एक्सीडेंट", "खेल खेल में", "अगली बार", "सिलवट का दूध",  "भूख", "मिस्ड कॉल के इंतजार में" जैसी कहानियाँ लिखकर लेखक ने अपने अनुभव जन्य विविधता का परिचय दिया है। 

कहानी "इजाजत" में  आज के आधुनिक युग में मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर  पड़ोसी की पार्टी में बाधा न उत्पन हो इसलिए पिता की मृत्यु पर भी रोने के लिए इजाजत माँगने पर नहीं मिली। 

कहानी जनता दरबार में तो लेखक ने पूरे सामाजिक तंत्र को ही नंगा करके रख दिया है। जिसमें मुखिया के पति के द्वारा सरकारी पैसे से मकान बनवाने के एवज में भीखू की पत्नी को दो महीने से ज्यादा जबर्दस्ती अपने पास बंधक बनाकर रखा गया था। फिर भीखू का भाई रोहन मौके पर जनतादरबार में पहुँचकर सी एम के सामने सारा राज खोल देता है। 

इस प्रकार कथाकार ने विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपनी पैनी दृष्टि रखते हुए बहुत ही खूबसूरती से  कलम चलाई है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।

कथा संग्रह - जनता दरबार
लेखक - शंभु पी. सिंह 
प्रकाशक - संस्कृति प्रकाशन 
पृष्ठ - 120 
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आलेख  - किरण सिंह
समीक्षक का ईमेल - kiransinghrina@gmail.com
छायाचित्र सौजन्य - किरण सिंह 
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com

किरण सिंह 


Monday, 1 April 2019

संगीत शिक्षायतन द्वारा कला प्रवाह और काव्य नन्दा का आयोजन पटना में 31.3.2019 को सम्पन्न

वसंत ऋतु में प्रेम वृष्टि
आलोक धन्वा, ध्रुव गुप्त अनवर शमीम, संजय कुमार कुंदन, गुलरेज शहजाद आदि ने पढ़ी कविताएँ

(आगमन की कवि गोष्ठी 31.3.2019 की रपट के लिए- यहाँ क्लिक कीजिए)


दिनांक 31.3.2019 की शाम देश के प्रतिष्ठित पटना आर्ट्स कॉलेज परिसर में 'कला प्रवाह' द्वारा आयोजित एक काव्य, कला एवं संगीत गोष्ठी में भागीदारी देश के कई शीर्षस्थ साहित्यकारों के लिए भी एक अनूठा अनुभव रहा। काव्य गोष्ठी में आलोकधन्वा, ध्रुव गुप्त, सुजाता शर्मा, अनवर शमीम, गुलरेज़ शहज़ाद, संजय कुमार कुंदन और यामिनी ने काव्यपाठ किया। गोष्ठी का बेहतरीन संचालन यामिनी का था। इसमें आर्ट्स कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं चित्रकार श्याम शर्मा, फिल्मकार ज़िया हसन, नाटककार सुमन कुमार, प्रशासक असलम हसन सहित दर्जनों ख्यातिप्राप्त लोगों की भागीदारी रही।

बड़े हर्ष उल्लास के साथ 31 मार्च'19 को पटना के संगीत शिक्षायतन द्वारा पटना आर्ट्स एंड क्राफ्ट कॉलेज पटना के सौजन्य से पटना आर्ट एंड क्राफट्स कॉलेज के प्रांगण में  गोंड जनजाति चित्रकला प्रदर्शनी, तथा कला - काव्य समागम संगोष्ठी का आयोजन किया। अवसर था कला - प्रवाह कार्यक्रम की तीसरी कड़ी जिसका विषय भारत की अक्षुण्ण गोंड जनजाति चित्रकला प्रदर्शनी तथा काव्य - नन्दा  जिसमें बिहार के जाने माने कवि द्वारा कविता का पाठ किया गया।

प्रदर्शनी में लगभग अस्सी-नब्बे प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न रंगों का प्रयोग करते हुए कैनवास पर गोंड जनजाति की चित्रकला प्रदर्शनी में प्रतिभागियों ने लोक परंपरा की चित्रकला शैली दिखाया तथा   कला द्वारा छिपी मानव चेतना को जागृत करने का माध्यम बतलाया जिसकी विशेष जानकारी  चित्रकार तान्या राजवंशी तथा  कीर्ति किरण  दिया। 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। उसके बाद  शिक्षायतन के म्यूज़ म्यूजिकल ग्रुप के द्वारा तस्लीम फजली की ग़ज़ल "रफ्ता रफ्ता मेरे हस्ती का सामा हो गए... पहले जां, फिर जाने जां, फिर जाने जाना हो गए।" से हुई । जिसने शुरू से ही कवि सम्मेलन के काव्य माहौल को एक मनोरम वातावरण बना दिया।

भारत का सर्वमान्य संवत विक्रम संवत है। प्रतिपदा को नंदा अर्थात आनंद देने वाली कहा जाता है,  इसलिए काव्य - नंदा कार्यक्रम में चैत्र मास की मनोहर सृष्टि से आनंदित होने के लिए बिहार के प्रमुख कवियों की एक काव्य संगोष्ठी आयोजित की गई थी। कार्यकर्म की निर्देशिका कथक नृत्यांगना  यामिनी ने बड़े ही लयात्मकता रूप में सार्थक शब्दों का प्रयोग करते हुए आमंत्रित कविगण आलोक धन्वा, ध्रुव गुप्त अनवर शमीम, संजय कुमार कुंदन, गुलरेज शहजाद और सुजाता शर्मा को सुगठित शब्द विन्यास के साथ एक एक कर मंच पर बुलाती गई और कवियों की कविताओं ने वहां उपस्थित दर्शकों में नववर्ष के उल्लास उमंग तथा मादकता का भरपूर संचार किया ।  वसंत ऋतु में प्रेम वृष्टि कर पटना आर्ट्स एंड क्राफ्ट के परिसर को आह्लादित किया। 

सभी कलाकारों ने एक से एक बढ़कर कविताओं को मंच पर प्रस्तुत किया। 

जाते-जाते भी कोई चीज हंसी रख देंगे, 
आने वाले नए मौसम का यकीन रख देंगे, 
ख़ाक उड़ाएंगे बहुत ख़ाक में मिल जाने तक, 
और यह ख़ाक भी हम लोग यहीं रख देंगे " 
(अनवर शमीम)

"खुशियां तो मेले की अल्हड़ लड़कियां थीं...खो गई , 
गम शरीके जिंदगी सा  होसला देता रहा।"
(संजय कुमार कुंदन)

यह दिल है ग़मज़दा हारा नहीं है, 
जो खो आया गगन वो सारा नहीं है, 
मेरी आवारगी पर हंसने वालों, 
 कोई मन है जो बंजारा नहीं है।
(ध्रुव गुप्त)

आंखो में आखे डालकर बातें करने की आदत डालो, 
हक को मांगना नहीं, लेना सीखा दो, 
असं नहीं हो लेना तो
 छीनने में देर ना करें, ये साफ बतादो...
(सुजाता शर्मा)

पहाड़ों को हटाना चाहता हूं हवा सा खिलखिलाना चाहता हूं 
मैं अपने आप से बिछड़ा कहां पर मैं खुद को याद आना चाहता हूं
(गुलरेज़ शहजाद)

पंक्तियों पर तालियों की गड़गड़ाहट लगातार बजती रही।

कार्यकर्म के विशिष्ट अतिथि अवधेश झा (कवि व लेखक) ने गोंड कला की विशेषता तथा भारतीय संस्कृति और जीवन के विक्रमी संवत से गहरेे संबंध को बतलाया। तथा मुख्य अतिथि  अंतरराष्ट्रीय स्तर के चित्रकार श्याम शर्मा के साथ डॉ० किशोर सिन्हा (केद्र निदेशक आकाशवाणी पटना, अवकाश प्राप्त,) साथ ही डॉ अजय कुमार पांडे (प्रिंसिपल पटना आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज, पटना) तथा  मीनाक्षी झा बनर्जी ( चित्रकार) का स्वागत सम्मान किया।

संस्था की सचिव रेखा शर्मा ने अंत में सभी प्रतिभागियों को उपहार दिया गया तथा विजेताओं को मेडल दिए गए विजेताओं के नाम पारुल, ईशा, लक्ष्मी, देवव्रत, प्रणव, यशोधारा, चित्रांगदा, हैं। गायन कलाकार: अमित, अंबिका, अनन्या, वर्षा, शिवम, आकाश, शुभम,।

केंद्र अधीक्षक रुधीश कुमार ने रंगो के प्रभाव पर प्रेरणात्मक शब्द कहें तथा साहित्य- सृजन की सक्रियता को बढ़ाते हुए कार्यक्रम का अंत धन्यवाद ज्ञापन से किया। 

कार्यक्रम का संचालन  यामिनी अपने सुगठित शब्द विन्यास के साथ किया। अंत में केंद्र अधीक्षक रुधीश कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
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आलेख - बेजोड़ इंडिया ब्यूरो (प्रथम अनुच्छेद श्री ध्रुव गुप्त के फेसबुक पटल पर आधारित)
छायाचित्र सौजन्य- यामिनी शर्मा
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी- editorbejodindia@yahoo.com
नोट- इस आलेख में दिनांक 6.4.2019 तक किये गए संशोधन सम्मिलित हैं.