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# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]
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Sunday, 13 October 2019
नवगीतिका लोक रसधार द्वारा छठ पर्व के गीतों पर नीतू कुमारी नवगीत का गायन 13.10.2019 को पटना में सम्पन्न

युवा कवि दिलीप कुमार का एकल काव्य पाठ 12.10.2019 को पटना में सम्पन्न

समय से रेस लगाते देखा
गाते और गुनगुनाते देखा
अपनी मंजिल की खैर नहीं
सबको मंजिल पर पहुंच आते देखा।
रेल पटरियों की देखरेख करने वाले ट्रैकमैन के जीवन से जुड़ी कविता को श्रोताओं ने खूब पसंद किया -दहकता हुआ सूरज /स मा गया है रेल की पटरियों में
पैरों में पड़ गए हैं छाले / चौंधिया गई हैं आंखें
फिर भी पटरियों की देखरेख का क्रम जारी है
उसका समर्पण सूरज की तपिश पर भारी है।
दिलीप कुमार ने बिहार के लोक जीवन और त्योहारों से जुड़ी कई कविताओं का पाठ कर श्रोताओं के दिल में जगह बनाई । सरल शब्द विन्यास के बावजूद दीप का सवाल कविता श्रोताओं को खूब पसंद आई -
दीपावली के दिन अपने घर आंगन में दीप जलाया/-
धरती से आसमान तक अंधेरे को मार भगाया/-
फिर अपने मन में एक दीप क्यों नहीं जलाते/-
मन के अंधेरे को दूर क्यों नहीं भगाते ?
इसी तर्ज पर उन्होंने रावण दहन से जुड़ी कविता औपचारिकता सुनाई:
धू-धू कर जल गया रावण का पुतला
शहर के बीच मैदान में
लोगों ने देखा तमाशा / बजाई तालियां
और लौट गए/ अपने-अपने घर को
मन की बुराई, मन में ही समेटे ।
महिला श्रोताओं को जलती तो बाती है कविता को पसंद आई -
दीया को जीवन मैंने दिया
जली रात भर, जग को रौशन किया
मैं औरत हूं
मुझे औरत ही बनाती है
वही औरत जो दिन भर खाना पकाती है
और रात में सबसे अंत में खाती है
वही औरत जो अधूरेपन में जीती है
लेकिन पूर्णता में देती है
किसी उपलब्धि का कभी श्रेय नहीं लेती है
सभी औरतों की एक जैसी थाती है
नाम दीए का होता है
पर जलती तो बाती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्टेशन निदेशक डॉ निलेश कुमार ने की। आयोजन के दौरान वरिष्ठ कवयित्री भावना शेखर ने कहा कि दिलीप कुमार की कविताओं में सादगी और सच्चाई है। मुकेश प्रत्यूष ने कहा कि इस्पाती चौखट में रहने के बावजूद उनकी कविताओं में मानवीय संवेदना है। मौके पर ध्रुव कुमार कुमार रजत, प्रणय प्रियंवद, शायर कासिम खुर्शीद, समीर परिमल, हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य वीरेंद्र यादव आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन कवि राजकिशोर राजन और धन्यवाद ज्ञापन सिद्धेश्वर ने किया।
.....
आलेख - नीतू कुमार नवगीत द्वारा भेजी गई सामग्री के आधार पर
छायाचित्र सौजन्य - डॉ. नीतू कुमारी नवगीत
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@yahoo.com

बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा डॉ. कुमार विमल जयंती -सह- कवि गोष्ठी 11.10.2019 को पटना में सम्पन्न

डॉ. कुमार विमल सौंदर्य शास्त्र के प्रथम विशेषज्ञ माने जाते हैं। ललित ढंग से सौंदर्य की शब्दाकृति होती है कविता। एक साथ कई पुस्तकें पढ़ा करते थे वे। समालोचना में, नलिन विलोचन शर्मा के बाद यदि किसी को स्मरण कर सकता हूं, तो वो कुमार विमल हैं।
छायाचित्र - सिद्धेश्वर


पचीसी (मिथिला का पारम्परिक खेल) / कंचन कंठ

सारी कौड़ियां पट्ट तो 'चौबीस' आना होता था। इनमें गोटियां नहीं 'पबहारि' यानी 'निकलना' नहीं होती थीं। एक कौड़ी चित्त और बाकी पट्ट तो 'पचीस' आता था,जिसमें चारों गोटियां 'पबहारि' होती थीं, एकसाथ। इसका उल्टा होने पर "दस"आता था और एक गोटी 'पबहारि' होती थीं। हरेक खिलाड़ी को चार मौके मिलतेे थे खेलने के, दस या पचीस आनेे पर एक मौका और मिलता था। गोटियां निकलती नहीं 'पबहारि' होती थीं और लाल होने से पहले नंबर पर अटकने पर गोटियों को 'पबन्नी' लगती थीं तो दूसरे पक्ष वाले उसकी चाल के समय "नरकी पबन्नी" चिढ़ाते थे जो "दस या पचीस" आने से छुटती थीं।
पर, अब तो "नहि ओ नगरी, नहि ओ ठाम"।
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| कंचन कंठ |
Friday, 11 October 2019
अमन शांति की खोज में, गया स्वर्ग के द्वार
22 वर्षीय श्रेष्ठ दोहाकार ग़ज़लकार अमन चांदपुरी के असामयिक निधन पर कविता
कवि - हरि नारायण सिंह 'हरि'
(बिहारी धमाका / बेजोड़ इंडिया ब्लॉग की ओर से
अत्यंत अल्प आयु के एक अति प्रतिभाशाली कवि के निधन पर हार्दिक शोक)
अमन शांति की खोज में, गया स्वर्ग के द्वार ।
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| शोक संतप्त कवि - हरिनारायण सिंह 'हरि' |
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| बिहार के कुछ कवियों के साथ अमन चांदपुरी |
| बिहार के कवियों के साथ अमन चांदपुरी |
Wednesday, 2 October 2019
अन्तरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस (1 अक्टूबर्) पर लेख्य मंजूषा की अंतराजाल साहित्य गोष्ठी
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| फाइल चित्र |
1. विश्वमोहन (दिल्ली) -
2. रंजना सिंह -
बुजुर्ग हमारे प्रहरी हैं
गाँव के हों या शहरी हैं
3. पूनम देवा -
बुजूर्गु हमारे घने वट वृक्ष की छाया है
क्या हुआ, अगर जीर्ण क्षीण ,इनकी काया है
उपर वाले की माया है
अगर हम पर इनकी छाया है।
4. प्रियंका श्रीवास्तव 'शुभ्र' -
बुजुर्ग घर के आन मान सम्मान हैं
बच्चों को उनसे मिलता सुंदर ज्ञान है
5. अभिलाषा सिंह -
खत्म होने के कगार पर खड़ी है जिंदगी
किसी खंडहर के द्वार पर पड़ी है जिंदगी
तुम्हारे ही प्यार ने दे रखी है वो ताकत
कि कई दफा मौत से लड़ी है जिंदगी
पास बैठो बुजुर्गों के कि बातें चंद कर सकें
इसी आस में आज तक धरी है जिंदगी।
लग जाना गले से फुर्सत निकाल कर कभी
यही सोचकर कि अब तो आखिरी है जिंदगी।
6. मधुरेश नारायण -
खुद बुजुर्ग हूँ, दूसरे बुजुर्गों के बारे में क्या कहूँ
अपनों को सब सुख मिले, दर्द मैं उनका सहूँ।
7. पूनम (कतरियार) -
सफेद बालों में संजोये दुनियादारी
जीवन-भर की कमाई वफादारी है
अशक्त -कमजोर हो या बीमारी
खुश दिखना इनकी लाचारी है
शब्द घुटते रहते हैं पोपले मुख के,
दिन कटते स्मरण में विगत सुख के।
8. राजेन्द्र पुरोहित (जोधपुर) -
बालों की सफेदी को सम्मान चाहिए
घर में बुजुर्गियत की पहचान चाहिए
दौलत की तबोताब की उनको नहीं है आस
बस वक़्त दीजिये, यही एहसान चाहिए।
9. मीरा प्रकाश -
बुजुर्गों के बिना घर अधूरा है
उनके पांव में स्वर्ग और धरा है
उनका प्यार मिले सभी को-
उनके ज्ञान बिना घर अंधेरा है।
10. मिनाक्षी कुमारी -
जिंदगी जो शेष है बस वही विशेष है
नहीं गुनाह बुढ़ापे का कुछ भी
एक अटल सत्य है आज यह भी।
इच्छा दफन कर जिंदगी भर तालमेल बैठाते रहे
शेष बचे जीवन के क्षण का
बाहें फैलाकर अब आप स्वागत करें।
11. नूतन सिन्हा -
बुजुर्ग हमारे लिये संचय किया हुआ धन से भी बढकर होते हैं उनके आगे धन दौलत भी फीका है धन तो खर्च हो जाता है परन्तु बुजुर्गों का शाया बरगद के पेड़ की तरह शीतल छाया देकर हरवक्त नया मार्गदर्शन देकर हमारी नई पहचान बनाते हैं। बोला जाये तो प्रकृति स्वरुप बुजुर्ग होते हैं जिनकी आवश्यकता हमारे शरीर के रक्त के समान होते हैं।
12. प्रेमलता सिंह -
बुजुर्ग के आशीर्वाद और प्यार से ही हमारा घर स्वर्ग समान बनता हैं। जैसे पेड़ कितना भी हरा -भरा हो, इसकी जड़ काट दी जाए तो पेड़ सूख जाता हैं। वैसे ही हमारे बुजुर्ग हमारे परिवार की बुनियाद हैं।
13. प्रभास कुमार 'प्रभास' -
जितना माता-पिता बच्चों की सेवा करते हैं
वृद्धावस्था में वो वापस नहीं पा पाते हैं
जब आती है ऋण चुकाने की बारी
तब उनके बच्चे अपना हाथ खड़ा कर देते हैं।
14. संजय कु सिंह -
भागती जिंदगी से कुछ पल निकाल लो
आज नहीं तो कल निकाल लो
बैठ जाओ कदमों तले उनके
अबूझ जीवन का हर हल निकाल लो।
15. राजकांता राज -
दादा-दादी, माता -पिता हमारे बल है
बुजुर्ग हमारे आने वाला कल है
बुजुर्ग पारिवार की नींव है
बुजुर्ग घर की रौनक है
16. विष्णु सिंह -
काँपते हाथ
झुर्रियाँ
किसको पसंद आते हैं
कौन चाहता है, ऐसे हालात में रहना
पर क्या करें समय का तकाज़ा है
अनुभव लेते लेते, सबको आना पड़ता है इस उम्र के पड़ाव पर
सब इन्हें बुजुर्ग कहते हैं
हम इन्हें धरोहर कहते हैं, छत कहते हैं।
ज़रा सोचिएगा,
बिना छत के मकान होते हैं क्या?
आओ मिलकर प्रण लें
झूठा अहंकार त्याग दे आज
ले बुजुर्गों का आशीर्वाद
ले हम बुजुर्गों का आशीर्वाद।
17. संगीता गोविल -
सब कुछ है घर में सिर्फ एक बुजुर्ग की कमी है,
आज खुद पोंछे जो यादों से उनकी आई नमी है।
जब थे वो घर में, सुरक्षित हम आजाद परिंदे थे,
अब गृहाधिपति बने तो जिम्मेदारियों की बर्फ जमी है।
18. कंचन अपराजिता (चेन्नई) -
बरगद के पेड़ को देखे..
कितनी बैठकों के गवाह बने
हमारे बुजुर्ग है उस छाँव जैसे
आभार उनका भी हम करे
उनके चेहरे पर मुस्कान
हम से ही तो रहते है खिले
चलो अपने कुछ पलों को
सिर्फ उनके लिए जी ले।
19. मधु खोवाला -
जिस घर में हो बुजुर्गो का सम्मान
आसमान भी करता है
उस घर को झुक कर प्रणाम।
.....
प्रस्तुति - विभा रानी श्रीवास्तव
प्रस्तोता का ईमेल - virani.shrivastava@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल -editorbejodindia@yahoo.com
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| फाइल चित्र |
मेरा साथ निभाना होगा / सिद्धेश्वर की कुछ कविताएँ
(उपरोक्त जानकारियाँ श्री सिद्धेश्वर एवं उनकी पत्नी श्रीमती बीना गुप्ता द्वारा प्राप्त सूचनाओं के आधार पर है.)
























