बिहारी धमाका / بہاری دھماکا - A blog in English, हिन्दी, اردو, मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका and बज्जिका. / Contact us at editorbejodindia@gmail.com (IT'S LINKS CAN NOT BE SHARED ON FACEBOOK but CAN BE SHARED IN WHATSAPP, TWITTER etc.) (For full view, open the blog in web/desktop version by clicking on the option given at the bottom.)
**New post** on See photo+ page
बिहार, भारत की कला, संस्कृति और साहित्य.......Art, Culture and Literature of Bihar, India ..... E-mail: editorbejodindia@gmail.com / अपनी सामग्री को ब्लॉग से डाउनलोड कर सुरक्षित कर लें.
# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]
यदि कोई पोस्ट नहीं दिख रहा हो तो ऊपर "Current Page" पर क्लिक कीजिए. If no post is visible then click on Current page given above.
Thursday, 14 May 2020
राष्ट्रीय संस्था "महिला काव्य मंच" बिहार प्रांत की मासिक काव्य - गोष्ठी (आभासी) दिनांक 10-5-2020 को संपन्न
Wednesday, 13 May 2020
सिद्धेश्वर का डायरीनामा / साहित्य प्रभात नामक आभासी गोष्ठी 10.5.2020 को संपन्न
साहित्य प्रभात का आरंभ करते हुए उपरोक्त उद्गार समिति के अध्यक्ष और संयोजक सिद्धेश्वर ने कहा। मातृत्व दिवस के अवसर पर ऑनलाइन दैनिक गोष्ठी के उद्घाटन के तहत मातृदिवस से संदर्भित कविता, गीत और लघुकथा का पाठ, देश भर के साहित्यकारों ने किया ! मुख्य अतिथि भगवती प्रसाद द्विवेदी ने मातृ दिवस पर अपनो एक भावपूर्ण लघुकथा का पाठ किया और कहा कि - "अपनी तरह का यह अनोखा आयोजन है, जो गृहबंदी में भी साहित्य की ज्योति जलाए रखने का सार्थक प्रयास कर रहे हैं सिद्धेश्वर जी।
Sunday, 10 May 2020
भोजपुरी और हिंदी के दिवंगत लेखक कृष्णानंद / लेखक - जितेन्द्र कुमार
कृष्णानंद कृष्ण एक अच्छे शायर और कवि थे । भोजपुरी में उन्होंने ग़ज़लें और सॉनेट लिखे। उनका ग़ज़ल-संग्रह है:नया सूरज चढ़ल जाता। 51 सॉनेटों का संग्रह है: आपन गाँव भेंटाते नइखे।
भोजपुरी साहित्य के वे चर्चित आलोचक थे। भोजपुरी आलोचना की उनकी उल्लेखनीय किताबें हैं:(1) भोजपुरी कहानी:विकास आ परम्परा, (2) हिंदी लघुकथा:स्वरूप और दिशा,।
इसके अतिरिक्त संपादित कृतियाँ हैं: (1) भोजपुरी कहानी,(2) समकालीन भोजपुरी कहानियाँ, (3) प्रतिनिधि कहानी भोजपुरी के,(4) इसी दिन के लिए, (5)लघुकथा:सृजन और मूल्यांकन (6) शताब्दी शिखर की हिंदी लघुकथाएँ (7) एक मुट्ठी लाई,(8) एकइसवीं सदी आ भोजपुरी,।उन्होंने आनंद संधिदूत और भाष्कर जी के साथ मिलकर"भोजपुरी के अस्मिता चिंतन"का संपादन किया।
वे भोजपुरी साहित्य के ऐक्टिविस्ट साहित्यकार थे।वे अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के पूर्व महासचिव थे।
उनका आशियाना पथ संख्या-8,अशोक नगर, कंकड़बाग कॉलोनी, पटना-20 में था। शायद उनके दो पुत्र और एक सुपुत्री हैं। तीनों व्यवस्थित हैं। उनकी पत्नी अभी हैं।
कंकड़बाग स्थित आवास पर मैं उनसे कई बार मिला था।अखिल भारतीय भोजपुरी सम्मेलन के विलासपुर और जमशेदपुर अधिवेशन में एवं कार्यकारिणी की बैठकों में उनसे मुलाकात होती थी।वे रिटायर्ड सहायक अभियंत्रण अभियंता थे। उनका जन्म 2 जुलाई,1947 को भोजपुर जिला के चाँदी गाँव (नरहीं चाँदी) में हुआ था।
उन्होंने भोजपुरी साहित्य की अप्रतिम सेवा की। उनके निधन से भोजपुरी और हिंदी साहित्य को अपूरणीय क्षति हुई है।इधर भोजपुरी के कई साहित्यकार लगातार मंच छोड़ते जा रहे हैं:पाण्डेय कपिल, गीतकार अनिरुद्ध, प्रो ब्रजकिशोर, कथाकार बरमेश्वर सिंह, कवि कथाकार संपादक जगन्नाथ जी, अक्षयवर दीक्षित जी सभी थोड़े समय में दिवंगत हो गए।
कृष्णानंद कृष्ण जी की स्मृति को नमन।
...................
लेखक - जितेन्द्र कुमार
लेखक का ईमेल आईडी - jitendrakumarara46@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ब्लॉग का ईमेल आईडी - editorbejodindia@gmail.com
Sunday, 3 May 2020
जनगीतकार नचिकेता) / लेखक-जितेन्द्र कुमार
![]() |
| साहित्यकार नचिकेता |
उपरोक्त जनगीत में प्रतिरोध और तंज की जो धार है वो किसी समकालीन कविता से कम नहीं है।ऐसा नहीं कि यह एकलौता जनगीत है इस तरह की अभिव्यंजना का, बल्कि ऐसे जनगीतों की भरमार है नचिकेता के यहाँ।
तो 23अप्रैल है; वीर कुँवर सिंह और बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर की जयंती है।सुबह शांत है। कोयल कूक रही है। मैं चाय पीते हुए मन ही मन पटना जाकर नचिकेता जी से मिलने की सोच रहा हूँ।अमिताभ दिल्ली गये हैं।रहते तो ट्रेन का पोजिसन बताते और स्टेशन से टिकट ला देते। मैं स्टेशन जाता हूँ।पूर्वा एक्सप्रेस तीन घंटे बिलंब से चल रही है। संभावित समय नौ बजे है।प्रभु जी जब से रेलमंत्री बने हैं, रेलगाड़ियाँ समय पर चलना भूल गई हैं।
नचिकेता जी ने तीन पुस्तकें मुझे भेंट स्वरूप दीं--रंग न खोने दें(2007),तुम्हीं तो हो(2015),कुहरे में सच(2014).कुहरे में सच में श्रीधर मिश्र का28पृष्ठों का आलेख:गीत-पुरुष:नचिकेता, उल्लेखनीय है।इसी तरह"तुम्हीं तो हो"की भूमिका15पृष्ठों की ब्रजेश पाण्डेय की काबिले तारीफ हीनहीं है, नचिकेता के गीतों को समझने में पाठक को मदद भी करती है।
लेखक का ईमेल आईडी - jitendrakumarara46@gmail.com
![]() |
| लेखक - जितेन्द्र कुमार |
Friday, 13 March 2020
होली मिलन समारोह पटना के रामकृष्ण नगर चित्रगुप्त समिति का 7.3.2020 को संपन्न
कार्यक्रम रामलखन महतो पथ, पटना में सम्पन्न हुआ. इस संस्था के अध्यक्ष- सत्येन्द्र नारायण, उपाध्यक्ष-अप्पू और सचिव- वाई.के.वर्मा हैं।
होली काव्योत्सव का रंगारंग संचालन करते हुए कवि सिद्धेश्वर ने कहा कि "सद्भावना भाईचारा का उत्सव है होली का त्योहार। आपसी रंजिशें भूलकर, आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने वाला पर्व है होली!" कवि मधुरश नारायण के संयोजन में प्रस्तुत इस साहित्यिक आयोजन में अपनी रंगीले छबीले और मदमस्त करने वाले गीतों, गजलों और व्यंग्य कविताओं का पाठ करने वाले चर्चित कवियों में प्रमुख थे- भगवती प्रसाद द्विवेदी , विश्वनाथ वर्मा, सुनील कुमार उपाध्याय, मनोज कुमार, मधुरेश शरण, सिद्धेश्वर और लता प्रासर!" भोजपुरी और हिंदी के चर्चित कवि सुनील कुमार ने अपनी कविता में फागुनी उन्माद भरते हुए कहा-
Saturday, 29 February 2020
रहना है जब साथ-साथ फिर तनातनी क्यों ? / कवि - हरिनारायण सिंह 'हरि'
2
गजल
दूर घर से रह रहे हैं, क्या कहें
दुःख कैसा सह रहे हैं, क्या कहें
पेट पापी भर सके इस वास्ते
कंटकों पर चल रहे हैं, क्या कहें
उफ्! सुगंधी स्वप्न निज परिवेश का
अब नहीं मह-मह रहे हैं, क्या कहें
दिवस सोते, रात का जब शिफ्ट है
रतजगा हम कर रहे हैं, क्या कहें
क्यों नहीं निज प्रांत में भी जाॅब हो
आप क्या-क्या कर रहे हैं,क्या कहें
पीर अपनी रोज बढ़ती जा रही
किस हवा में बह रहे हैं, क्या कहें !
----
मूल पता - मोहनपुर (बिहार)
कवि का ईमेल - hindustanmohanpur@gmail.com
कवि का परिचय - कवि हिंदी और बज्जिका के जाने-माने साहित्यकार और पत्रकार हैं.
प्रतिक्रिया हेतु ब्लॉग का ईमेल - editorbejodindia@gmail.com
Tuesday, 25 February 2020
पाटलिपुत्र काव्य महोत्सव का आयोजन नवभारती सेवा न्यास द्वारा पटना में 23.2.2020 को पटना में सम्पन्न

युवा कवयित्री प्रीति सुमन ने "आई प्रणय की मधुर बेला रे" गीत सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। ज्योति स्पर्श ने भूख की विवशता पर मार्मिक ग़ज़ल का पाठ कर लोगों को भाव-विह्वल कर दिया। अन्य कवियों में शिवांशु सिंह, प्रेरणा प्रताप, नेहा नुपूर, आराधना प्रसाद, रवि सिंह पार्थ, मुकेश ओझा, अनुराग कश्यप ठाकुर, भारती रंजन कुमारी, स्वतंत्र शांडिल्य, राहुल चौधरी, साकेत ठाकुर, सुनील कुमार, कवि घनश्याम, रंजीत दुधू, गौतम वात्स्यायन, नरेंद्र कुमार, प्रियंका प्रियदर्शिनी, सिद्धेश्वर, डॉ नीलम श्रीवास्तव, कुमार आर्यन, नवनीत कृष्ना, अभिलाषा सिंह, स्वराक्षी स्वरा, कुमारी स्मृति, कुमार रजत, चंदन द्विवेदी सहित कुल 50 कवियों ने शिरकत किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था की सचिव सह कार्यक्रम संयोजिका प्रीति सुमन ने किया।











































