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बिहार, भारत की कला, संस्कृति और साहित्य.......Art, Culture and Literature of Bihar, India ..... E-mail: editorbejodindia@gmail.com / अपनी सामग्री को ब्लॉग से डाउनलोड कर सुरक्षित कर लें.

# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Sunday, 23 February 2020

स्टे. रा.भा.का.स. पूर्व मध्य रेल और भा.यु.सा.प. द्वारा पटना में एकल काव्य पाठ और कवि गोष्ठी 22.2.2020 को सम्पन्न

दौड़नेवालों के साथ दौड़ते हैं उनके सपने

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स्टेशन राजभाषा कार्यान्वयन समिति, पूर्व मध्य रेल, दानापुर मंडल तथा भारतीय युवा साहित्यकार परिषद् , पटना के संयुक्त तत्वावधान में श्री राजमणि मिश्र  (राजभाषा अधिकारी पूर्व मध्य रेल, दानापुर मंडल) के एकल काव्य पाठ का आयोजन ट्रेंनिग स्कूल,राजेन्द्र नगर कोचिंग कॉम्प्लेक्स के सभागार में किया गया. आयोजन की अध्यक्षता हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि और साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी तथा संचालन शायर मो.नसीम अख्तर और कवि-चित्रकार श्री सिद्धेश्वर ने किया.

मुख्य अतिथि राजमणि मिश्र ने अपने एकल काव्य पाठ में विभिन्न विषयों पर आधारित अनेक कविता, गीत तथा ग़ज़लें प्रस्तुत की. उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक यथार्थ, पारिवारिक समस्याएं, सुदूर शहरों में मजदूरी करने वाले गांव के लोगों के मनोभावों की सार्थक अभिव्यक्ति हुई है. कल्पना के साथ सटीक बिंबों का प्रयोग कर वे कविताओं को जीवंत बनाने में सफल रहे हैं।

इस समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि-"राजमणि मिश्र की कविताओं में लालित्य देखने को मिलता है। घर ,परिवार से शुरुआत कर  इन्होंने समाज -संस्कृति और आज के पूरे हालात पर अपनी संवेदनात्मक अभिव्यक्ति कोगहराई से प्रकट किया है"

राजमणि की कविताओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए विशिष्ट अतिथि कवि सिद्धेश्वर ने कहा कि -"नकारात्मक परिवेश में भी सकारात्मक संदेश देती हुई राजमणि मिश्र की कविता हृदय की गहराई तक संवेदित  करती है। इनकी सकारात्मक सोच हमें कुछ रखने के लिए प्रेरित करती है ।अप- संस्कृति पर भी उनकी गहरी नजर है।"

समारोह के मुख्य अतिथि कवि घनश्याम ने कवि राजमणि मिश्र की  कविताओं के एकल पाठ के पश्चात, विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि -"दैनिक जीवन के क्रियाकलापों पर राजमणि जी की गहरी दृष्टि है । थोड़े में बहुत कुछ कहने की कला इनकी कविताओं में देखने को मिलती है । सचमुच यह छोटी- सी गोष्ठी कई महत्वपूर्ण विचारों को लेकर यादगार बन गई है।"

राजमणि मिश्र जी ने अपनी एकल काव्य पाठ में लगभग 40 से अधिक समकालीनकविताओं का पाठ किया।
  -"मुसाफिर यहां उम्र भर के लिए/ मरने वालों को अमृत से क्या फायदा  
जीने वालों को विष का प्याला से बचाना पड़ा/ रोते-रोते मुस्कुराना पड़ा।"

"मैं भी दौड़ने लगता हूं, / उनके साथ -साथ /मुझे लगता है/ 
दौड़ने वालों के साथ दौड़ते हैं /उनके सपने, सुरक्षा,-सुरक्षा की भावनाएं।"

"चलने लगा मैं कदम दर कदम / मिलने लगी चट्टानें और चुनौतियां।
"-इस तरह की ढेर सारी कविताएं समकालीन संदर्भों को रेखांकित कर रही थी ।

एकल काव्य पाठ के अंतराल में उपस्थित कवि, शायर और कवयित्रियों ने एक से बढ़कर एक कविता,गीत और ग़ज़लों से आयोजन को सरस और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इनमें भगवती प्रसाद द्विवेदी, अशोक प्रजापति, घनश्याम, सिद्धेश्वर, अरविन्द पासवान, मो. नसीम अख्तर, मुकेश ओझा, अनुराग कश्यप ठाकुर, कवयित्री डा.अर्चना त्रिपाठी, श्वेता शेखर, मीना कुमारी परिहार के नाम उल्लेखनीय है।

राजेन्द्र नगर स्टेशन पर अवस्थित रामवृक्ष बेनीपुरी पुस्तकालय की संचालिका कुमारी स्वीटी ने आगत साहित्यकारों के प्रति  धन्यवाद ज्ञापन किया।
.....

प्रस्तुति एवं छायाचित्र - सिद्धेश्वर एवं घनश्याम
एक प्रस्तोता का ईमेल - sidheshwarpoet.art@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ब्लॉग का ईमेल - editorbejodindia@gmail.com





















Monday, 17 February 2020

'कलमगार' द्वारा "ओ री चिड़ैया' शीर्षक के अंतर्गत पर्यावरण विषयक कवि-गोष्ठी का आयोजन 16.2.2020 को पटना में सम्पन्न

कौन लिख रहा पत्ते पत्ते पर / काले धुएँ का गीत
वो प्यारी- प्यारी गौरैया / नजर नहीं अब आती है **  ओ ! पम्प मोटर वालों / अरे पानी बचा लो

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हम अक्सर उन्हीं चीजों को भूल जाते हैं जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होती हैं - जैसे जीवन सँवारने में माँ, कॅरियर निर्माण में शिक्षक और जीवन के बचे रहने हेतु पर्यावरण

लाखों रुपयों के ऑक्सीजन के सिलिंडर खरीदकर हम रख लें तो भी वो उसकी क्षतिपूर्ति नहीं कर पाएगा जो  बाहर की स्वच्छ हवा के प्रदूषित होने से होती है। हमारी पारिस्थितिकी का एक-एक जंतु और पौधा एक-दूसरे से किसी-न-किसी कड़ी के तहत जुड़ा है और अगर हम किसी प्रजाति को विलुप्त कर देते हैं जैसा कि बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया के साथ लगभग हो रहा है, तो किसी न किसी तरह से पूरे जीवन-शृंखला को ही तोड़ने जा रहे हैं।  कविगण तो हमेशा से प्रकृति से बेपनाह प्यार करनेवाले रहे हैं।  इसलिए पर्यावरण और गौरैया पर जागृति लाने हेतु एक कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया पटना में।

संस्कारशाला पुस्तकालय के सभागार में, 'कलमगार' द्वारा आयोजित जल, हवा, पानी और गौरेया को बचाओ योजना के तहत आयोजित, कार्यशाला एवं कवि गोष्ठी का सारस्वत आयोजन किया गया।

पटना के राम लखन महतो फ्लैट्स स्थित "संस्कारशाला सह पुस्तकालय के प्रांगण में 16.2.2020 को 'कलमगार' के द्वारा काव्य सरिता नामक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसका थीम "जल, जंगल, जमीन, प्रकृति तथा पशु-पक्षी" था।

कार्यक्रम में कुल 37 प्रतिभागियों ने पर्यावरण, प्रकृति पर अपनी काव्य रचना सुनाकर श्रोताओं का इसके संरक्षण व संवर्धन की ओर ध्यान आकृष्ट किया। कार्यक्रम में मंच संचालन कवि मणि कान्त कौशल और संयोजन सुमन सौरभ ने किया। युवा कवयित्री रश्मि गुप्ता ने पर्यावरण पर सारगर्भित कविताओं का पाठ किया।

शायर मो. नसीम अख्तर को वह पल भुलाये नहीं भूलता जब उन्होंने कहीं पनाह पाई थी - 
जिसकी घनी छाँव के तले हमने
सुलगती धूप में पनाह पाई थी
हर ओर जले थे प्रेम के दीये
अंधेरी रात की तक़दीर जगमगाई थी।

लोभी-स्वार्थी अदूरदर्शी मानवों द्वारा नैसर्गिक सौंदर्य और जीवनरक्षक संपदाओं के क्षरित-विच्छिन्न और विरूपित होते चले जाना आज समूची जीव जगत के लिए विनाशक हो चुका है। इस स्थिति से आज के मुद्दों को उठानेवाली अनेकानेक सशक्त कविताओं के रचयिता कवि सिद्धेश्वर खिन्न हैं. उनकी टीस  महसूस की जा सकती है-
"कौन लिख रहा /पत्ते -पत्ते पर 
  काले धुएं का गीत ?
  आकाश के सुंदर चेहरे पर
  कौन कालिख पोत रहा ?
*धरती पर कौन 
  प्रदूषण का बीज बो रहा
  शोर में कौन बदल रहा 
  धरती का मधुर संगीत
 *अपराधी है कौन?
  हम सब हैं / जो धरती को बांट रहे
  जीव-जंतु, पेड़, पहाड़ तक उनको काट रहे
  मातमी चुम्बन लेकर कौन कर रहा
  विनाश से प्रीत?

बैंक अधिकारी होते हुए हुए भी साहित्य की अनवरत साधना कर मिसाल कायम करनेवाले युवा कवि संजय कुमार, प्रकृति को दिल की गहराइयों से प्यार करते हैं और उसे बचाने की उनकी आकांक्षा आज वेदना के रूप में उभर रही है -
दौड़ती भागती जिंदगी में
किसे याद रहता है
पहाड़ नदियां पेड़ और पौधे
जो कभी कोई सुध ले
कि हमारी वेदना है क्या
जल जीवन और हरियाली
तुम्हारी चेतना के निकट
कभी जा पाती है क्या

विपुल शरण की पंक्ति भी प्रकृति के छेड़छड़ से दुखी लगे-
"कैसे करूं मैं वर्णन 
 तू है मेरा पर्यावरण के साथ 

मणिकान्त कौशल  लुप्तप्राय प्यारी सी नहीं गौरैया पंक्षी को बेचैनी से साथ खोजते दिखे - 
"जाने कहां वो चली गई /जाने क्या- क्या खाती है ,/
वो प्यारी- प्यारी गौरैया / नजर नहीं अब आती है !/

अमृतेश मिश्रा द्वारा ने पानी का अपव्यय करनेवाले नए धनाढ्यों को एक झटका दिया गया- 
"ओ ! पम्प मोटर वालों ,/अरे पानी बचा लो / 

भावप्रवण युवाकवि केशव कौशिक की गीत 
  बादलों   में   तैरते   गाँव   घर
  कहो   सुखन   कभी  देखा  है
*वहाँ  गगन   को  छूते   पहाड़
  उनसे   गुजरते    पक्के   रास्ते
  देख  यह   मन   हर्षित   होता
  स्कूल    जाते   बच्चे   विहँसते
  ऊँचे  पहाड़ों  से  गिरता  निर्झर
  कहो सुखन.....
  *छोटे - छोटे   उनके  पक्के  घर
  जिनमें   रहते   हैं   लोग   प्यारे
  मेघ  अंजलि   भर   पानी  देता
  प्रकृति    के    वे   अति  दुलारे
  दहकते   आग   जैसा   दिनकर
  कहो सुखन.....
*कल-कल स्वर से बहती नदियाँ
  घर - घर पानी का नलका रहता
  बचपन   के   पूरे   होते    सपने
  मेघ पकड़-पकड़ जेब में रखता
  घन - घटा का ऊन -सा मंजर
  कहो सुखन.....

कवयित्री रश्मि गुप्ता की नजरों में प्रकृति के नयनाभिराम दृश्यों का नहीं दिखना सबसे बड़ी वंचना है -
बहुत दिनों से
नही देखी थी उसने हरियाली
फूल, चिड़िया, झरना
सुबह की लाली या शाम की सुहानी बेला।

कलमगार की टीम गौरैया संरक्षण के कार्यक्रम में एक कदम आगे बढ़ते हुए अब शहर में प्रकृति संरक्षण हेतु लोगों को उनके घर जाकर प्रेरित करने वाली है कलमगार की मानें तो गौरैया संरक्षण के लिए बर्ड हाउस के साथ साथ प्रकृति तथा बगीचे का बढ़ना जरूरी है ताकि जीवन के की श्रंखला सतत चलती रहे। इस अवसर पर विपुल शरण श्रीवास्तव, संजीव कुमार, संजय कुमार आदि उपस्थित रहें।

इस प्रकार पर्यावरण को समर्पित कवि=गोष्ठी में उत्साहपूर्वक भाग लेकर  एक जन-जागृति लाने का जोरदार प्रयास सम्पन्न हुआ
...........

रपट का आलेख - सिद्धेश्वर 
छायाचित्र - सिद्धेश्वर
प्रस्तुति - हेमन्त दास 'हिम'
रपट के लेखक का ईमेल- sidheshwarpoet.art@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु इस ब्लॉग का ईमेल - editorbejodindia@gmail.com
नोट - जिन प्रतिभागियों की पंक्तियाँ इसमें शामिल नहीं हो पाईं हों वो उन्हें ऊपर दिये गए सम्पादक के ईमेल पर भेज सकते हैं.























Sunday, 9 February 2020

बाबा बैद्यनाथ झा की पर्यावरण संरक्षण पर कुण्डलियाँ और ग़ज़ल

 1.पानी
   कुण्डलिया छन्द

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         १           
पानी  ही  है  सर्वदा, जीवन  का  आधार। 
इसका संरक्षण करें, होगा अति उपकार।। 

होगा अति उपकार, इसे मत व्यर्थ बहाएँ। 
आवश्यक उपयोग, करें जब आप नहाएँ।। 

प्यासे मरते जीव, त्याग दें अब मनमानी। 
प्राणवायु  के  साथ, जीव हर चाहे पानी।।

         २              
पानी  तो  अनमोल  है, जान  रहे  हैं  आप। 
इसे बहाकर  व्यर्थ ही, क्यों  करते  हैं पाप।। 

क्यों करते हैं पाप, आप अब  पुण्य कमाएँ। 
पानी  की  हर बून्द, अभी से  आप  बचाएँ।। 

अथवा  होगा  नाश, नहीं  हो  अब नादानी।
पंचतत्व में एक, प्रमुख आवश्यक  पानी।।


                 
 2. हवा
कुण्डलिया छन्द
             
जीना   अब   दूभर   हुआ, सभी   चाहते  त्राण 
हवा   विषैली   हो  गयी, संकट   में   हैं  प्राण।। 

संकट  में   हैं  प्राण,  बढ़ा   है   आज   प्रदूषण।
काट   रहे   हैं  पेड़,  अभी भी  कुछ खर दूषण।।

प्राणवायु  का  लोप, मात्र  विष  पड़ता   पीना। 
स्वच्छ हवा बिन आज, कठिन है सबका जीना।।
          

 3. पर्यावरण - ग़ज़ल
              
इन्सान  दानवों  सा  जंगल  उजाड़ता  है
अन्याय  देख   रोकर   पर्वत  पुकारता  है

बन  गिद्ध  नोचता  है हर अंग  को कसाई
विस्फोट कर जड़ों से सबको उखाड़ता है

विध्वंस  हो  रहा है वनसम्पदा विलोपित
मगरूर   हँस   रहा   है  शेखी  बघारता है

नदियाँ  भी  सूखती  हैं वन, शैल सब नदारत
इन्सान  ज़िन्दगी को  खुद ही बिगाड़ता है

नदियों में स्वच्छ जल हो, वन, शैल सब हरे हों
उनको  उजाड़ मानव  जीवन बिगाड़ता है

है  पुण्यभूमि भारत  उत्तर खड़ा हिमालय
जिसके चरण युगल को सागर पखारता है

है  लुप्त  प्राणदायक  विषयुक्त ही हवा है
अब भी न  चेत मानव  ग़लती सुधारता है

जो  पेड़  है  लगाता, पर्वत  रखे  बचाकर
समझो वही जगत का  जीवन सँवारता है
......

कवि - बाबा बैद्यनाथ झा 
कवि का ईमेल - jhababa9431@gmail.com ,  jhababa55@yahoo.com
कवि का पता - हनुमान नगर,श्री नगर हाता, पूर्णियाँ (बिहार) 854301
कवि का मोबाईल नम्बर- 7543874127  (वाट्सअप)
प्रतिक्रिया हेतु इस ब्लॉग का ईमेल - editorbejodindia@gmail.com
कवि का परिचय -
 पत्नी--- डॉ.हीरा प्रियदर्शिनी (बी ए एम एस, ए एम)
जन्म तिथि- 3 अगस्त,1955
जन्म स्थान- कचहरी बलुआ,भाया- बनैली,जिला- पूर्णियाँ  (बिहार) 854201
शिक्षा--एम ए  (द्वय) - हिन्दी (स्वर्ण पदक प्राप्त) + दर्शन शास्त्र,CAIIB, होमियोपैथ
प्रकाशित पुस्तकें-
"बाबा की कुण्डलियाँ" (270 कुण्डलियों का संकलन)
"जाने-अनजाने न देख ( 104 ग़ज़लों का संग्रह),
"निशानी है अभी बाकी" (105 ग़ज़्लों का संग्रह)-2019     
"पढ़ें प्रतिदिन कुण्डलियाँ" (300 कुण्डलियों का संग्रह)2019
"ईमान यहाँ बिकता" (100 ग़ज़लों का संग्रह)--2019
'पहरा इमानपर'  (मैथिली गजल संग्रह),  '-1989  कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन

हिन्दी एवं मैथिली साहित्य की प्रायः  हर विधा में लेखन
सम्पादन-"मिथिला सौरभ", "त्रिवेणी", "भारती मंडन" आदि
आकाशवाणी पटना,दरभंगा एवं पूर्णियाँ से पचासाधिक बार- काव्यपाठ एवं रेडियो नाटकों में अभिनय
दर्जनों साहित्यिक सम्मान से विभूषित.
अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा आयोजित कवि-सम्मेलनों/मुशायरों  में अध्यक्षता तथा काव्यपाठ।

Saturday, 8 February 2020

भा. युवा साहित्यकार परिषद और स्टे.रा..भा. क्रि. समिति, राजेंद्रनगर टर्मिनस की साहित्यिक गोष्ठी 5.2.2020 को पटना में सम्पन्न

चल करें फूलों की खेती / सुगंधित मन-प्राण हो 

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दिनांक 5.2.2020 को भारतीय युवा साहित्यकार परिषद्,पटना की ओर से राजेन्द्र नगर टर्मिनल स्थित रामवृक्ष बेनीपुरी पुस्तकालय में सुप्रसिद्ध गीतकार,कवि एवं कथाकार भगवती प्रसाद द्विवेदी की अध्यक्षता तथा बेतिया से पधारे वरिष्ठ गीतकार और मुख्य अतिथि डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना  एवं आरा से पधारे वरिष्ठ कवि और विशिष्ट अतिथि जीतेन्द्र कुमार की  उपस्थिति में एक सार्थक और सफल काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पटना के अनेक सुपरिचित एवं प्रतिष्ठित कवि-कवयित्रियों ने अपनी श्रेष्ठ सम- सामयिक कविताओं का रसास्वादन कराया.

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध चित्रकार-कथाकार एवं कवि सिद्धेश्वर की काव्य पुस्तिका "काव्य कलश" का लोकार्पण भी किया गया. कवि गोष्ठी का संचालन श्री सिद्धेश्वर और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ गीतकार मधुरेश नारायण  ने किया..

कविता की विविध रंगों की सारगर्भित रचनाओं को लेकर कवि सिद्धेश्वर ने समकालीन संदर्भों को बहुत ही शिद्दत के साथ अपनी नई किताब "काव्य कलश" में उकेरा है। साहित्यिक संस्था "भारतीय युवा साहित्यकार परिषद" और राजेंद्र नगर टर्मिनल स्टेशन राजभाषा कार्यान्वयन समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित लघु पुस्तक "काव्य कलश" का लोकार्पण करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद दिवेदी ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किए।

समारोह के आरंभ में सचिव मो, नसीम अख्तर ने स्वागत भाषण के दौरान कहा कि कम पृष्ठों में अधिक सामग्री को संजोना सिद्धेश्वर जी की कलात्मक सूझ-बूझ है।

 समारोह के मुख्य अतिथि गोरख प्रसाद मस्ताना ने कहा की सिद्धेश्वर के रेखाचित्र कविता के साथ बोलते नजर आते हैं।

कवियत्री डॉ अर्चना त्रिपाठी ने, काव्य कलश में प्रकाशित "कविता बच्चे झूठे नहीं होते", "जीवन एक वसंत है", "लगाव", "काले धुंए का गीत" की प्रशंसा करते हुए कहा कि "सिद्धेश्वर की कविताएँ कम शब्दों में बहुत कुछ कहती हुई प्रतीत होती हैं।"

रामवृक्ष बेनीपुर हिंदी पुस्तकालय के कक्ष में आयोजित इस सारस्वत साहित्यिक समारोह के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का संचालन किया सिद्धेश्वर ने किया।  यह कवि गोष्ठी अतिथि कवि गोरख प्रसाद मस्ताना को समर्पित था।

तो आइये, इस अवसर पर बही काव्य रसधार की कुछ बूंदों का पान करते हैं-

हाल ही में "रोज डे" मनया गया। और इसी संदर्भ में इस विशिष्ट गोष्ठी के सर्वप्रमुख आकर्षण रहे गोरख प्रसाद मस्ताना की यह कविता आज के अशांतिपूर्ण माहौल में भी शीतलता प्रदान करनेवाली और सच्ची राह दिखाती हुई प्रतीत हुई  -
 "*चल करें फूलों की खेती, सुगंधित मन प्राण हो ।
    सुवासित कण-कण धरा सब के लिए वरदान हो
  *सिंचाई हो स्नेह की और खाद होवे प्रीत की 
     नेह के छिड़काव पर खेती हो उत्तम गीत के
    सांस के अंतिम शिखर तक भाव में कल्याण हो!
 *सब में हो सद्भावना तो एकता का भाव हो
    प्यार के खलिहान में तिल भर भी न दुर्भाव हो
    कि अब जो बोएँ बीज उसमें संतुलित सम्मान हो!
 *शास्त्रीयता हो हरी साहित्य की हर उपज में
    जैसे पंखुड़ियाँ सजी होती हैं नीले जलद में
    परागों में शब्द के तुलसी भी हों रसखान हो!

सिद्धेश्वर की नजरों में ये जाति, धर्म, नैतिकता, मानवता तो कहने की बाते हैं. असली मसला तो गरीब की रोटी का है -
आदर्श, नैतिकता, प्रतिभा न तो मानवता है बहुत कुछ  
 देश को लूटने वालों की चर्चा है बहुत कुछ 
न जाति, न धर्म, न आबरू, न शरम
पेट के लिए रोटी का टुकड़ा है बहुत कुछ!"

शमां कौसर शमां देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत दिखीं-  
"रहे शादाब  हर दम ये चमन अपना
रहे शादां हमेशा ये वतन अपना
न आए आंच अज़मत पर कभी उसकी
न हो नापाक फिर ग॓ग व जमन अपना "

मो.नसीम अख्तर आज के माहौल में व्याप्त हिंसात्मकता से आजिज़ हो गए लगते हैं -
"हाथ में जब सभी के ही पत्थर रहे
किस तरह सलामत कोई सर रहे !"

सच्चे देशभक्त को आप मार तो सकते हैं पर डरा नहीं सकते देश को नुकसान पहुँचानेवालों को चुनौती देते हुए कवि घनश्याम कहते हैं -
 मुझको मरना ही होगा तो मर जाऊंगा
 अपनी खुशबू तेरे नाम कर जाऊंगा
 भूल कर भी नहीं यह भरम पालना
तू जो धमकाएगा तो मैं डर जाऊंगा।"

 डॉ रश्मि गुप्ता का कहना है कि इंसान, नदियों  की तरह नहीं होता जो जब चाहे बदल ले खुद को -
"नदी बदल लेती है धारा 
 रास्ता खुद चुन लेती है अपने बहाव का
 इंसान बदल लेता है है वस्त्र 
 नहीं बदल पाता है / अपने स्वभाव को "

सबसे गहरा होता है वह सागर जो नयनों में बहता है। पूनम सिन्हा 'श्रेयसी' कहती हैं-
 छ्ल- छ्ल छलके है नयनों में!
 सागर की बेटी छलक-छलक
 तड़प रही है अब पिया बिना
 सागर की बेटी ढुलक-ढुलक। "

किसी की चाहत मिले तो ज़िंदगी संवर जाती है पर जब चाहत हद से ज्यादा हो तो मीना कुमारी 'मीना' के शब्दों में -
 "जो भी कहती हूं वह अफ़साना बनाते क्यूँ हो?
 मेरी हर बात को सीने से लगाते क्यों हो?
 इतना चाहो न मुझे और परेशान न करो
 मेरे हर दर्द को आँखों से बहाते क्यों हो?"

इस उथली संवेदना वाले आधुनिक युग में कुछ लोगों ने चेहरे को ही किताब मान लिया पर एक अनुभवी कवि मधुरेश शरण को अच्छी तरह मालूम है सच्ची पुस्तक किसे मानना चाहिए-
 "गगन में उड़ने दो
 जीवन की पुस्तक पढ़ने वाले
 यहाँ सबसे अधिक अनुभव है
 हमें अपना जीवन गढ़ने दो।"

एक कर्मण्य पुरुष को कार्य में ही आनंद आता है सो कार्यालय का कार्यकाल समाप्त हो जाने का अहसास तक नहीं होता पूर्व में अन्य कवियों द्वारा पढ़ी गई रचनाओं पर अपनी संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए इस गोष्ठी के अध्यक्ष भगवती प्रसाद द्विवेदी कहते हैं-
"समझ में कुछ भी ना आया, कब रिटायर हो गए! 
फुदकती आंगन की चिड़ईं मैं उड़ाने भर गया था !"

उनकी अतिरिक्त अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया -उन्में प्रमुख हैं, आराधना प्रसाद, प्रभात कुमार धवन, शुभचंद्र सिन्हा, जितेंद्र कुमार, हरेंद्र सिंहा, उमेश, कुमारी स्वीटी।
 मधुरेशशरण के धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस सारस्वत आयोजन का समापन हुआ ।
.....
आलेख - मो. नसीम अख्तर / घनश्याम
छायाचित्र सौजन्य - घनश्याम
प्रस्तुति - हेमन्त दास 'हिम'/ सिद्धेश्वर
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@gmail.com
गीत का वीडियो - यहाँ क्लिक कीजिए


























Wednesday, 5 February 2020

कथाकार हरिवंश नारायण और उनका रचनाकर्म / भगवती प्रसाद द्विवेदी

मानव जीवन के गणित में स्त्री एक स्थिरांक है - हरिवंश की दृष्टि में
(दिनांक 1.2.2020 को श्री अरबिंद महिला महावि.,पटना में भगवती प्र. दिवेदी द्वारा दिया गया सम्पूर्ण व्याख्यान)

(मुख्य पेज पर जाइये- bejodindia.blogspot.com / हर 12 घंटे पर देखते रहें - FB+ Today)

व्याख्यान कर्ता - भगवती प्रसाद द्विवेदी

हाल ही में साहित्य कला संसद, बिहार  और श्री अरविंद महिला कॉलेज, पटना द्वारा संयुक्त रूप से विख्यात कथाकार हरिवंश नारायण की 7वीं पुण्यतिथि पर एक उनके कृतित्व को समर्पित एक व्याख्यान आयोजित हुआ था . इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता थे प्रसिद्ध कवि और कथाकार-उपन्यासकार श्री भगवती प्रसाद द्विवेदी. चूँकि बेजोड़ इंडिया के मुख्य पेज पर दिये गए कार्यक्रम की रपट में व्याख्यान का एक अंश ही दिया जा सका और पाठकगण इसे पूरा पढ़ना चाहेंगे अत: यहाँ हम उनकी ही हस्तलिपि में लिखी उनके व्याख्यान का सम्पूर्ण प्रस्तुत कर रहे हैं. आशा है आपको पसंद आएगा.
- सम्पादक, बेजोड़ इंडिया ब्लॉग












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लेखक - भगवती प्रसाद द्विवेदी
पता- शकुंतला भवन, सीताशरण लेन, मीठापुर, पोस्ट बॉक्स-115, पटना -800001 (बिहार)
दूरभाष -06122214967, चलभाष - 9430600958, 9304693031
 लेखक का ईमेल - dubeybhagwati123@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल - editorbejodindia@gmail.com