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# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Sunday, 20 August 2017

चित्रावली- स्ट्रगलर्स द्वारा नुक्कड़ नाटक 'पेट की भूख' प्रस्तुत तथा कला जागरण द्वारा 'बाबू जी का पासबुक' मचित

पेट की भूख
संस्था- स्ट्रगलर्स द्वारा प्रस्तुत / निर्देशक -रमेश कुमार रघु

      स्थानीय प्रेमचंद रंगशाला परिसर में स्ट्रगलर्स, पटना द्वारा रमेश कुमार रघु लिखित एवं निर्देशित नुक्कड़ नाटक "पेट की भूख" का मंचन किया गया। पढ़ाई कर रहे कुछ बच्चों की हालिया स्थिति को अवगत कराते हुए उनके दुःस्वप्न के बहाने भिखारियों की स्थिति की पड़ताल करती है। साथ ही उनकी ज़िंदगी भी सामान्य नही है । आज के समय मे आम जनता के साथ भिखारियों के साथ भी भ्रष्टाचार,कमीशनखोरी, टैक्स वसूली इत्यादि होता है।सरकारी अधिकारी, (पुलिस), लुच्चे और बदमाश किस तरह भिखारियों को परेशान करतें हैं ,यह कई दृश्यों के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया। भाग लेनेवाले कलाकारों में रौशन कुमार,विशाल जायसवाल, रोहित कुमार,सन्नी कुमार,पवन कुमार,आदित्य कुमार,मनीष कुमार,पुष्पक ठाकुर और राजू आलम थे।
(-राजन कुमार सिंह)













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बाबूजी का पासबुक
संस्था- कला जागरण, पटना द्वारा प्रस्तुत / निर्देशक - सुमन कुमार










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