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# DAILY QUOTE # -"हर भले आदमी की एक रेल होती है/ जो माँ के घर तक जाती है/ सीटी बजाती हुई / धुआँ उड़ाती हुई"/ Every good man has a rail / Which goes to his mother / Blowing wistles / Making smokes [– आलोक धन्वा, विख्यात कवि की एक पूर्ण कविता / A full poem by Alok Dhanwa, Renowned poet]

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Saturday 12 August 2017

विस्तार, पटना द्वारा 'आसाम मेल' का मंचन 11.8.2017 को पटना में

   चारदिवसीय थियेटरवा-ला नाट्योत्सव के दूसरे दिन कालिदास रंगालय, पटना में अनिल कुमार मुखर्जी द्वारा लिखित और उज्ज्वला गांगुली द्वारा निर्देशित नाटक 'आसाम मेल' समय से बहुत आगे की कहानी कह रहा है. एक नारी जिसे पति को दिये गए प्रण के कारण मातृत्व सुख प्राप्त नहीं हो पाता वह अपने मातृत्व के अधिकार के लिए एक पहले से शादी-शुदा पराये मर्द की बाँहों में शराब पीकर समा जाने की क्रिया पर गर्व अनुभव करती है और यह नाटक उसी का महिमामंडन कर रहा है. एक आश्चर्यजनक रूप से साहसिकता का प्रदर्शन करती है यह कथावस्तु जिसकी प्रस्तुति में निर्देशकीय कौशल विशेष रूप से दिखा जो कि नये कलाकारों से भी अपने कथ्य को मंच पर दिखाने में सफल रहे. विशेष टिपण्णी बाद में की जाएगी.































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